यह विडंबना ही है कि जहां एक ओर सरकार और गैर सरकारी संगठन एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न अपनाने की सलाह देती हैं, वहीं कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं जिससे इन सब पर पानी फिरता नजर आता है।
ताजा मामला पश्चिम बंगाल के विशुपुर का है, जहां 7 वर्षीय बच्चे को एचआईवी पीड़ित होने की वजह से स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
छात्र बंगाली मीडियम स्कूल के दीपशिखा नर्सरी स्कूल में तीसरी कक्षा का छात्र है। छात्र की मां ने जब बच्चे के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि की तो उस स्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों के अभिभावकों ने विरोध किया। (तस्वीर साभार - The Indian Express)
मजबूरन कराई जांच
यही नहीं, छात्र की दादी जो इसी स्कूल में टीचर हैं, उन्हें भी अपनी 'शुद्धता' प्रमाणित करने के लिए एचआईवी जांच कराने के लिए मजबूर किया गया, तब जाकर उन्हे्ं स्कूल में पढ़ाने की अनुमति दी गई।
छात्र की मां खुद एक गैर सरकारी संगठन में कार्यकर्ता हैं जो लोगों को एचआईवी के प्रति जागरुक करता है। छात्र की मां को बच्चे के एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी जनवरी में हुई।
बच्चे की जांच कराने के बाद उन्होंने अपनी भी जांच कराई जिसमें वो भी इस रोग से ग्रसित निकली। बताते चलें कि उनके पति भी एचआईवी से ग्रसित हैं, जिसकी जानकारी मई 2014 में हुई।
हेडमास्टर ने जताई आपत्ति
छात्र की मां के अनुसार जब उन्होंने बच्चे के एचआईवी पॉजिटिव होने की बात स्कूल के हेडमास्टर संजीब नस्कर को बताई तो उन्होंने इस बात से आश्वस्त किया था कि बच्चे को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।
उनके मुताबिक एक दिन हेडमास्टर संजीब ने उनसे फोन पर कहा कि छात्र अब इस स्कूल में नहीं पढ़ सकता क्योंकि अन्य बच्चों के अभिभावकों को इस बात पर आपत्ति है।
उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल प्रशासन ने उनसे कहा कि छात्र के लिए एक अलग कमरे की व्यवस्था कर दी जाएगी जहां वो बाकी बच्चों से अलग बैठेगा।
'मुझे बहुत दुःख होता है'
बीते 5 महीनों से छात्र अपने छोटे से घर में अकेले पढ़ने की कोशिश कर रहा है। छात्र का बड़ा भाई एचआईवी से ग्रसित नहीं है। जब वह बाहर खेलने जाता है तो 7 साल का यह बच्चा कहता है कि 'मैं वापस स्कूल जाना चाहता हूं, मैं अपने दोस्तों के साथ पढ़ना चाहता हूं। जब भी मैं अपने दोस्तों को स्कूल यूनिफॉर्म में देखता हूं तो मुझे बहुत दुःख होता है।'
वहीं इस मामले पर स्कूल के हेडमास्टर संजीब नस्कर का कहना है कि उन्होंने छात्र के परिवार से यह कभी नहीं कहा कि वे अपने बच्चे को स्कूल न भेजें। वो खुद ही कई दिनों से नहीं आ रहा है।
अगर वो आता है तो उसके साथ किसी भी तरह का शोषण नहीं होगा। उसी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र के अभिभावक सुधीप का कहना है कि अगर वो बच्चा स्कूल में वापस आया तो मेरा बच्चा वहां नहीं पढ़ेगा।
इस मामले की जानकारी होने पर महिला एवं बाल विकास मंत्री शशी पंजा का कहना है कि स्कूल को छात्र को वापस बुलाना ही होगा। इसके बाद भी अगर छात्र का परिवार स्कूल बदलना चाहते हैं तो यह उन पर निर्भर है।