सहारनपुर दंगे के आरोप में हाईप्रोफाइल रिपोर्ट से सियासत गरमाने लगी है। दंगे से पहले भीड़ को उकसाने मामले में भी एमएलसी और पूर्व विधायक को घेरने की तैयारी हो रही है। रिपोर्ट में इस बात जिक्र है कि दोनों ने भीड़ को उकसाया। ऐसे में एफआईआर के आधार पर राजनीतिक दल प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, इस मामले के खुलासे के बाद एमएलसी और पूर्व विधायक की मुसीबत भी बढ़ने लगी हैं। इस मामले में अब तक नजरअंदाज रहे दर्जा प्राप्त मंत्री के बेटे के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज करने की मांग उठने लगी है।
29 जुलाई को दंगे के मास्टर माइंड मोहर्रम अली पप्पू के साथ एमएलसी उमर अली खान और पूर्व विधायक इमरान मसूद भी नामजद हुए थे। मामला हाईप्रोफाइल होने से पुलिस इस रिपोर्ट को दबाए बैठी थी। अब मामले का खुलासा होने पर उनकी मुसीबतें बढ़नी लाजिमी है। 26 जुलाई को रात में जब लोग थाने पहुंचे थे तब भीड़ बहुत कम थी। इनकी मौजूदगी में ही एकाएक भीड़ आई और दंगा भड़का। हालांकि शुरूआत से ही इन नेताओं का नाम दंगे से जुड़ रहा था, मगर मोहर्रम अली पप्पू की गिरफ्तारी के बाद कुछ हद तक मामला शांत रहा।
अब रिपोर्ट ने पुलिस और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस गलती मान रही है और मुकदमा संख्या 306 का हवाला दे रही है। मगर, वादी ने साफ कर दिया है कि उसकी रिपोर्ट सही है। ऐसे में पुलिस पर गिरफ्तारी का दबाव है। इस मुद्दे को विपक्ष भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में जुटा है।