मद्रास हाई कोर्ट ने साफ किया है कि जैसे ही किसी हिंदू महिला को संपत्ति दी जाती है उसके मालिकाना पर उसका पूरा हक हो जाता है। भले ही इस संबंध में होने वाले करार में किसी प्रतिबंध या सीमा का जिक्र हो लेकिन वह संपत्ति की पूरी तरह मालकिन होगी।
हाई कोर्ट की जज एस विमला ने इस संबंध में धर्मराज पिल्लई की दूसरी पत्नी जयलक्ष्मी के समर्थन में दिए गए कुड्डलोर जिला कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए फैसला सुनाया।
दरअसल इस मामले में धर्मराज पिल्लई की पहली पत्नी स्वर्णाथम्मल ने कालिपेरुमल को संपत्ति बेच दी थी। यह संपत्ति स्वर्णाथम्मल को दी गई थी। जयलक्ष्मी ने इसका विरोध किया। उसका कहना था कि समझौते के मुताबिक स्वर्णाथम्मल का अधिकार सीमित है।
लेकिन हाई कोर्ट ने उसके इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि समझौता पत्र में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है उसके मुताबिक हिंदू उत्तराधिकार कानून की धारा 14 के संदर्भ में स्वर्णाथम्मल का इस संपत्ति पर पूरा अधिकार है।
इस अधिकार को सीमित नहीं माना जा सकता। इसलिए पहली पत्नी स्वर्णथम्मल को संपत्ति बेचने का पूरा अधिकार है और यह कानून की ओर से मान्य है।