प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं है, ऐसा मानने वाले अब अपनी धारणा बदल लें। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में जो बदलाव हुए हैं या जो संकेत मिल रहे हैं, उससे तय है कि अगले कुछ वर्षों में हिंदी वाले ही अफसरी करेंगे। यूडीए-एलडीए के बाद लोअर सबआर्डिनेट परीक्षा में बदलाव से इसका आगाज भी हो गया है।
राज्य लोक सेवा आयोग ने लोअर सबआर्डिनेट परीक्षा का पैटर्न बदल दिया है। इस बदलाव में सामान्य अध्ययन और हिंदी ही चयन का माध्यम होगा। पहले मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन, हिन्दी-निबंध के अलावा दो वैकल्पिक विषयों की परीक्षा होती थी। यही दोनों विषय चयन का मुख्य आधार भी होते थे।
नंबर के आधार पर हिंदी की हिस्सेदारी बहुत कम होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में दोनों विषय समाप्त कर दिए गए हैं। अब केवल दो पेपर सामान्य अध्ययन तथा हिन्दी एवं निबंध के होंगे। चूंकि निबंध में भी हिंदी ज्ञान को परखा जाता है। ऐसे में इस बदलाव से यह साफ है कि कुल मेरिट का 50 फीसदी अंक हिंदी से मिलेगा।
समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा में पहले ही बदलाव हो चुका है। इसमें भी मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन तथा हिंदी-निबंध के पेपर होते हैं। यानी, इस भर्ती में भी सामान्य अध्ययन के बाद हिंदी की महत्ता है। इसके अलावा पीसीएस मुख्य परीक्षा में भी सी-सैट लागू करने की प्रक्रिया जारी है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने यह व्यवस्था लागू भी कर दी है। यहां भी जल्द इस पर निर्णय होने की उम्मीद है। इसके तहत वैकल्पिक विषय समाप्त हो जाएंगे।
महाराष्ट्र का मॉडल यहां भी अपनाया गया तो मुख्य परीक्षा में हिंदी का एक पेपर होगा। हालांकि चयन में इसका कितना महत्व होगा, यह पूरा प्रारूप सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन यह तय है कि इस बदलाव से महत्ता जरूर बढ़ेगी।
काउंसलर रनीश जैन का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में जिस तरह से बदलाव हो रहे हैं उसमें सामान्य अध्ययन के बाद हिंदी ही दूसरा विषय होगा। इसलिए प्रतियोगियों को इसे अब गंभीरता से लेना होगा। नए बदलाव से सभी के लिए सफलता के समान अवसर होंगे।