हिंदी साहित्य के नामचीन लेखक और हंस पत्रिका के संपादक राजेंद्र यादव का सोमवार देर रात निधन हो गया। वे 85 साल के थे।
हिंदी में दलित एवं स्त्री विमर्श को नई दिशा देने वाले राजेंद्र यादव के निधन से साहित्य एवं बौद्धिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जनसंस्कृति मंच जैसे अनेक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
संघ का कहना है कि हिंदी साहित्य के बौद्धिक जगत में वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने वाला एक लेखक चला गया। यादव ने युवा पीढ़ी को हमेशा अपनी पत्रिका हंस के माध्यम से आगे बढ़ाने की पहल की।
राजेंद्र यादव का जन्म 28 अगस्त 1929 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। अक्षर प्रकाशन के बैनर तले यादव ने हंस का फिर से प्रकाशन प्रेमचंद की जयंती 31 जुलाई 1986 से शुरू किया था।
यादव ने 30 से अधिक किताबें लिखी और 1986 से प्रसिद्ध जनवादी पत्रिका हंस का संपादन करते रहे।
राजेंद्र यादव की प्रसिद्ध कृतियों में सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, कुलटा, शह और मात शामिल हैं। उनकी रचना सारा आकाश पर फिल्म भी बनी थी।