नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल को कोर्ट में पेश होना होगा। हाईकोर्ट ने इनके पेश न होने की गुजारिश वाली याचिका को खारिज कर दिया। सोनिया और राहुल ने की तरफ से यह अनुरोध किया गया था कि उन्हें इस मामले में कोर्ट में पेश होने से छूट दी जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को नेशनल हेराल्ड मामले में कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। इन दोनों को इस मसले पर निचली अदालत के समन के खिलाफ अपील की थी। अपील में कोर्ट में पेश होने से छूट लेने की मांग की गई थी।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इनकी याचिका खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। बस अपने फैसले में इस फैसले को खारिज कर दिया। इस बारे में कोर्ट अपनी कार्रवाई पांच दिसंबर को ही पूरी कर चुका था।
कोर्ट में पेश न होने की छूट मिलने वाली याचिका के खारिज होने के बाद अब सोनिया और राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होना होगा। यह मामला पटियाला हाऊस कोर्ट में चल रहा है।
इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता सुब्रहमणियम ने कहा कि कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद उन्हें अब हर हाल में कोर्ट में पेश होना होगा। स्वामी ने इसे अपनी जीत बताई।
पांच दिसंबर को सुनवाई हो गई थी पूरी
7 दिसंबर को जो फैसला आया है उसकी पूरी कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच दिसंबर को ही पूरी कर ली थी। उसने यह फैसला सुरक्षित कर लिया था। इसके पहले कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा दायर किए गए उन आवेदनों को ‘निरर्थक’ करार दिया है, जिनमें यह आरोप लगाया गया था कि नेशनल हेराल्ड मामले में उनके द्वारा दर्ज कराई गई चुनौती के साथ ‘अलग बर्ताव’ किया गया।
कांग्रेस के नेताओं ने अपने आवेदन में इस मामले को न्यायाधीश सुनील गौड़ की अदालत से न्यायाधीश पी एस तेजी की एक अलग अदालत में स्थानांतरित किए जाने का विरोध किया था।
न्यायाधीश गौड़ की अदालत में इस मामले की आंशिक सुनवाई आठ माह तक हो चुकी थी। न्यायाधीश गौड़ ने ‘आवेदनों’ को निरर्थक करार दिया क्योंकि मामले को उच्च न्यायालय के पंजीयन द्वारा उनके समक्ष अधिसूचित किया गया है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले से अपने हाथ नहीं खींचे थे। उन्होंने कहा कि याचिकाएं वापस उनके पास इसलिए आइ’ क्योंकि मामले की आंशिक सुनवाई उन्होंने की थी।
क्या हैं आरोप और क्या हैं कांग्रेस के जवाब
सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट आरोप लगाया था कि सोनिया और राहुल ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की 5,000 करोड की संपत्ति जब्त कर ली।
पहले नेशनल हेराल्ड की कंपनी ऐसोसिएट जनरल लिमिटेड AJL को कांग्रेस ने 26 फरवरी, 2011 को 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है।
उनका कहना था कि10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडियन को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को AJL के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी यंग इंडियन को मुफ्त में स्वामित्व मिल गया। स्वामी ने इस 90 करोड़ रुपये के प्रकरण में हवाला कारोबार का शक जताया है।
स्वामी ने आरोप लगाथा था कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 1,600 करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया।उनका आरोप है कि साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है।
हेराल्ड हाउस को फिलहाल पासपोर्ट ऑफिस के लिए किराये पर दिया गया है। स्वामी का कहना है कि हेराल्ड हाउस को केंद्र सरकार ने समाचार पत्र चलाने के लिए जमीन दी थी, इस लिहाजा से उसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
इस मामले में कोर्ट में सोनिया और राहुल गांधी का पक्ष रखते हुए हाईकोर्ट में उनके वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि कांग्रेस को सालों से डोनेशन मिलता रहा है। पार्टी उसे जैसे चाहे खर्च कर सकती है। कोई दूसरा इसके लिए सवाल नहीं उठा सकता। स्वामी के अलावा अब तक किसी ने सवाल नहीं उठाया। अब तक पार्टी को जो डोनेशन मिला था वह नियमों के मुताबिक मिला था।
सिब्बल ने कहा कि 90 करोड़ का जो ट्रांजैक्शन था वह कमर्शियल काम के लिए नहीं था बल्कि एक विचारधारा के लिए था। यह विचारधारा थी नेशनल हेराल्ड का रिवाइवल। इस बात का जिक्र कांग्रेस प्रवक्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी किया था। इस अखबार से कांग्रेस की भावनाएं जुड़ी हैं, क्योंकि इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी। किसी भी शेयरहोल्डर ने शिकायत नहीं की, इसलिए यह केस नहीं बनता। यंग इंडिया के शेयर होल्डरों को किसी भी तरह का कोई फायदा नहीं मिला।