एमबीए छात्रा से दुराचार करने के आरोपी मथुरा के पत्रकार कमलकांत उपमन्यु के खिलाफ चल रही जांच मनमाने तरीके से बदलने के मामले में सरकार घिर गई है। प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। सरकार से जवाब मांगा है कि किन परिस्थितियों में आरोपी की मांग पर जांच बदली गई। वह भी तब जब पीड़िता अपना बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करा चुकी है।
मथुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय पाल सिंह तोमर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस सुनीत कुमार की खंडपीठ ने डीजीपी यूपी की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की है। पीठ ने कहा कि डीजीपी के पत्र से साफ है कि विवेचना मुख्यमंत्री के ओएसडी (न्यायिक) द्वारा उनको लिखे पत्र के बाद मथुरा से फिरोजाबाद स्थानांतरित की गई। आईजी आगरा रेंज को लिखे पत्र में डीजीपी ने लिखा है ‘सरकार की मंशा है कि जांच स्थानांतरित की जाए’। डीजीपी ने विवेक का प्रयोग न कर राजनीतिक दबाव में निर्णय लिया।
खंडपीठ को यह भी अवगत कराया गया कि आरोपी वकील और पत्रकार है, इसलिए अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच बदलवा दी। उसके भाई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था जिसके बाद विवेचना फिरोजाबाद स्थानांतरित करने का निर्णय हुआ। पीठ ने सीजेएम मथुरा को इस आदेश की जानकारी पीड़िता और उसके परिवार को देने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।