उत्तराखंड में राहत और बचाव कार्यों ने जैसे-तैसे रफ्तार पकड़ी थी कि सोमवार को भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने से नई मुसीबत खड़ी हो गई।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अब भी 15 हजार से ज्यादा लोग फंसे हैं और राज्य सरकार ने दूसरे राज्यों की राहत और बचाव से जुड़ी कोशिशें रोकने का फैसला किया है।
खराब मौसम की वजह से सेना के ज्यादातर बड़े हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सके, जिन पर लोगों को बचाने का जिम्मा था। इसके अलावा छोटे हेलीकॉप्टर के जरिए बदरीनाथ, पंडुकेश्वर और लांबागढ़ से केवल 138 लोगों को निकाला जा सका।
चमोली और पौड़ी जिले से खबरें आई हैं कि ऊपरी इलाकों में जोरदार बारिश हो रही है, जिससे राहत कार्य में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
राजधानी देहरादून में कुछ यही हाल है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग और बदरीनाथ हाइवे पर नए सिरे से भूस्खलन होने से रूट दोबारा थम गया है।
भारी बारिश के बाद पौड़ी के पैठानी कस्बे में मुलान गांव में बादल फटने की खबर मिली है। वहां कई मकान ढह गए हैं। इस हादसे में कोई हताहत हुआ या नहीं, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है।
कई राज्यों ने उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के लिए अपनी टीम भेजी थी, लेकिन राज्य सरकार ने किसी राज्य को इस तरह के प्रयासों के साथ आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी।
दिल्ली में गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि राज्य में मारे जाने वाले लोगों की तादाद 1,000 के पार पहुंच सकती है। कल उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य ने कहा था कि कम से कम 5,000 लोग मारे गए हैं।
हवाई राहत अभियान का जिम्मा संभाल रहे रिटायर्ड विंग कमांडर कैप्टन आर एस बरार का कहना है कि अभी बदरीनाथ से 5,000 लोगों को निकाला जाना है, लेकिन सहस्रधारा हैलीपैड से एक भी हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका।
बारिश के बीच राज्य सरकार सबसे ज्यादा मार झेलने वाली केदारनाथ घाटी में अंतिम ऑपरेशन के बारे में विचार कर रही थी, लेकिन अब उस दिशा में आगे नहीं बढ़ा गया है।
एनडीएमए के सदस्य वी के दुग्गल ने कहा कि राहत और बचाव कार्यों से जुड़े कुछ ऑपरेशनल मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
रुद्रप्रयाग के एसपी बीरेंद्रजीत सिंह ने कहा, 'जिले के कुछ हिस्से में सड़कें अब भी काफी कमजोर हैं। इसलिए मैंने बाढ़ में लापता हुए लोगों को तलाश रहे पर्यटकों और दूसरे लोगों को तुरंत ऋषिकेश रवाना होने के निर्देश दिए हैं।'