नक्सली इलाकों में तैनात जवानों के दिल कुछ ज्यादा कमजोर हो चले हैं। नक्सली हमले से ज्यादा जवानों की मौत हार्ट अटैक से हो रही है। बीते पांच सालों के आंक़डों में यह तथ्य सामने आया है कि नक्सलियों के हमले से ज्यादा हार्ट अटैक के कारण सीआरपीएफ के जवानों की मौते हुई हैं।
वहीं नक्सल इलाकों में खुदखुशी करने वाले जवानों की संख्या भी चौंकाने वाली है। वर्ष 2009 से और 2014 के आंकड़े बता रहे हैं कि नक्सल प्रभावित इलाकों में हार्ट अटैक से 642 जवानों की मौत हो चुकी है और वहीं 228 जवानों ने खुदखुशी की है। जबकि नक्सली हमले में कुल 323 जवान मारे गए।
खुदखुशी कर रहे जवान
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक गृह राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच सालों में नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात 642 सीआरपीएफ के जवानों की मौत हार्ट अटैक से हुई। तो वहीं 228 जवानों ने खुदखुशी की। उन्होंने बताया कि नक्सलियों के हमले में 323 जवान शहीद हुए, और करीब 108 जवान मलेरिया से जवानों की मौत हुई।
सरकार की ओर से जवानों के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि जवानों की छुट्टी की एप्लिकेशन को समय से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं अधिकारियों को जवानों को उनकी परेशानियों को बताने के लिए निर्देशित किया गया है।
क्या कर रही सरकार
ड्यूटी के अलावा जवानों को उनके मनोरंजन के इंतजाम भी किए गए हैं ताकि वे अवसाद में आकर खुदखुशी जैसे कदम न उठाएं। चौधरी ने बताया कि जवानों की पेंशन के लिए कम से कम 10 साल की सेवा की बाध्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। वहीं विलांग हुए जवानों को भी मुआवजा दिया जा रहा है। राज्य मंत्री चौधरी ने नक्सल क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी बताया।
बता दें कि कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा ने सरकार से नक्सल प्रभावित इलाकों में जनवरी 2009 से दिसंबर 2014 के बीच मारे गए जवानों के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके अलावा बोरा ने नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात सीआरपीएफ जवानों के लिए किए जा रहे काम की भी जानकारी मांगी थी।