आरुषि-हेमराज हत्याकांड के अभियुक्त राजेश और नूपुर तलवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी।
सीबीआई की ओर से 14 गवाहों को अभियोजन पक्ष की सूची से हटाने के खिलाफ तलवार दंपति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अभियुक्त इन गवाहों के बयान दर्ज कराना चाहते हैं।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। तलवार दंपति ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर सीबीआई अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 14 गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किए जाने की दलील को खारिज कर दिया गया था।
इन गवाहों में सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक अरुण कुमार भी शामिल हैं। अरुण कुमार इस समय उत्तर प्रदेश पुलिस में अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) हैं।
गाजियाबाद की ट्रायल कोर्ट ने 14 गवाहों के बयान दर्ज करने की अर्जी को 6 मई को खारिज कर दिया था। साथ ही तलवार दंपति को निर्देश दिया था कि वह सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपने बयान दर्ज कराएं।
अभियोजन पक्ष के आखिरी गवाह के रूप में सीबीआई के जांच अधिकारी एजीएल कौल का बयान दर्ज किया जा चुका है। सीबीआई ने 14 लोगों को पहले गवाहों की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में इन्हें गवाहों की सूची से हटा दिया गया।
तलवार दंपति की ओर से इन गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किए जाने की मांग की जा रही है। हटाए गए गवाहों में सीबीआई के कुछ अफसर भी शामिल हैं, जिन्होंने नौकरों को अभियुक्त बनाया था।
बचाव पक्ष चाहता है कि नौकरों को जेल की सलाखों के पीछे ले जाने वाले अफसरों को गवाह के रूप में तलब किया जाए ताकि अभियोजन पक्ष की कहानी को संदेह के घेरे में लाया जा सके।