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दिल्ली गैंगरेपः आज से फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

Mon, 21 Jan 2013 10:27 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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दिल्ली गैंगरेप के पांच अभियुक्तों के खिलाफ आज से साकेत फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई शुरु होगी। इस मामले में छठे आरोपी की उम्र 17 साल है, इसलिए उसकी सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट में की जाएगी। गौरतबल है कि 16 दिसंबर की रात चलती बस में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुए गैंगरेप पूरे देश को हिला कर रख दिया था।  
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इस वारदात के खिलाफ राजधानी दिल्ली समेत देश भर में प्रदर्शन हुए थे और महिलाओं की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर बहस शुरू हो गई थी। 13 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद पीड़िता ने 29 दिसंबर को सिंगापुर में एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था।  

वहीं, वारदात के एक अभियुक्त मुकेश ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर में केस मथुरा स्थानांतरित करने का आग्रह किया। उसका कहना है कि दिल्ली के उत्तेजना भरे माहौल में निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई नहीं हो सकती। कोर्ट के याचिका पर जल्द सुनवाई किए जाने की उम्मीद है।
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सामूहिक बलात्कार और हत्या के अभियुक्त मुकेश ने स्थानांतरण याचिका में कहा है कि लगातार हो रहे आंदोलन के कारण पुलिस और न्यायिक अधिकारी लोगों की आकांक्षा के अनुरूप आदेश देने के लिए दबाव में हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली की अदालत में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।

इस मामले में मुकेश के खिलाफ हत्या, सामूहिक बलात्कार और अप्राकृतिक अपराध करने सहित कई आरोप हैं। आरोपियों में राम सिंह, उसका भाई मुकेश और पवन गुप्ता, विनय शर्मा तथा अक्षय ठाकुर शामिल हैं। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत हत्या, सामूहिक बलात्कार, हत्या के प्रयास, अपहरण, अप्राकृतिक अपराध, डकैती, लूटपाट के दौरान चोट पहुंचाने, सबूत नष्ट करने, आपराधिक साजिश रचने के आरोप हैं।

मुकेश ने अपने वकील मनोहर लाल शर्मा के जरिए यह स्थानांतरण याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि चूंकि इस घटना से दिल्ली के हर घर की भावनाएं जुड़ी हैं और यहां तक कि न्यायिक अधिकारी तथा शासन भी इससे अछूता नहीं है। इसलिए इन परिस्थितियों में उसे किसी भी स्थिति में न्याय नहीं मिल सकेगा।

याचिका में कहा गया है कि यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जा चुका है। इस प्रकरण के बारे में मीडिया की खबरों, आंदोलन और राजनीतिक बयानों, मुख्यमंत्री तथा कैबिनेट मंत्रियों की व्यक्तिगत दिलचस्पी के कारण न्यायपालिका याचिकाकर्ता के खिलाफ काम करने के लिए दबाव में है।

याचिका में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में इस मामले को दिल्ली से बाहर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थानांतरित कर देना चाहिए। याचिका के अनुसार मीडिया ट्रॉयल और इस घटना को लेकर रोजाना हो रहे आंदोलनों के कारण यह मसला घर-घर पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता के वकील को भी धमकी मिल रही है और अदालत कक्ष में भी उसे ठीक से सुना नहीं गया है।
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