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ये हैं दुनिया के सबसे बड़े तेल खज़ाने के मालिक

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सऊदी अरब के शाह अब्दुल्लाह की मौत के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश के शाह की गद्दी उनके सौतेले भाई शाह सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ को मिली है।
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रियाद प्रांत के 48 साल तक गवर्नर रहे सलमान 2011 में देश के रक्षा मंत्री बने और एक साल बाद युवराज। अब 79 साल की उम्र में उन्हें गद्दी मिली है, हालांकि शाह अब्दुल्ला की तबियत ख़राब रहने के कारण राजकाज की ज़िम्मेदारी उन्होंने पहले ही संभाल ली थी।

पहले से ही ताकतवर
शाह सलमान शाही परिवार के उस असरदार गुट का अहम हिस्सा हैं जो शाह इब्न सऊद की पसंदीदा बेगम प्रिंसेस हसा अल सुदायरी के बच्चों और उनके परिवार से बना है। 1982 से 2005 तक शासक रहे शाह फ़हद और दो पूर्व युवराजों सुल्तान और नाएफ की मौत के बाद सलमान इस गुट के सबसे ताकतवर जीवित सदस्य रहे हैं।
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रियाद के गवर्नर के रूप में उन्होंने अलग-थलग पड़े रेगिस्तानी शहर को आकाशछूती इमारतों, विश्वविद्यालयों और पश्चिमी खान-पान वाले रेस्तराओं की जगह में तब्दील करने की इबारत लिखी। इस ओहदे ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दी, देश में आने वाले विशिष्ट लोगों, राजदूतों की मेहमानवाजी का मौक़ा दिया और विदेशी निवेश को अपने यहां बुलाने में मदद की।

रक्षा मंत्री के रूप में वह उस समय सऊदी सेना के प्रमुख थे जब वह अमरीका और दूसरे अरब देशों के साथ सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हवाई हमले में शामिल हुई।

कम व्यावसायिक हित

सरकार में शामिल दूसरे शाही परिवारों की तुलना में देखा जाए उनके कम कारोबारी हित हैं, कम से कम घोषित रूप से। उनके वारिसों में से तीन बेटे सऊदी रिसर्च एंड मार्केटिंग ग्रुप के प्रमुख हैं। यह समूह अखबारों और पत्रिकाओं का मालिक है। इनमें लंदन स्थित दैनिक अशरक़ अल अवसात भी शामिल है।

माना जाता है कि शाह सलमान ने खुद को कभी शेयरधारक के रूप में रजिस्टर नहीं कराया है। शाह के बेटे और उनकी ज़िम्मेदारियां इस तरह हैं- प्रिंस मोहम्मद को रक्षा मंत्री और रॉयल कोर्ट का प्रमुख बनाया गया है जबकि प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ को तेल विभाग का उपमंत्री नियुक्त किया गया है।

प्रिंस फैसल मदीना के गवर्नर हैं। प्रिंस सुल्तान पर्यटन निगम के प्रमुख हैं। प्रिंस तुर्की एसआरएमजी के चेयरमैन हैं।

धार्मिक छवि

बीबीसी के रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का कहना है कि शाह सलमान को अपने पूर्ववर्ती शासक की तरह राजनीतिक और सामाजिक सुधारों में दिलचस्पी रखने वाला नहीं माना जाता है।

उनकी प्राथमिकता सऊदी अरब में स्थिरता बनाए रखने की होगी। कैरन इलियट हाउस ने सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों पर किताब लिखी है, उन्होंने बीबीसी से कहा, "शाह सलमान की छवि सऊदी अरब के धार्मिक नेतृत्व की ओर झुकाव रखने वाले शख़्स की है। आप यह मान सकते हैं कि सऊदी अरब में कट्टर धर्म को लागू करने की उनकी इच्छा को कुछ जगह मिल सकती है।"

प्रतिक्रिया देने वाले दूसरे लोगों ने शाह सलमान की उस छवि का ज़िक्र किया है जिसमें उन्हें विशाल शाही परिवार में मध्यस्थ के रूप में देखा जाता है। शाही परिवार की तमाम जटिलताओं और खींचतान के बीच वह सबको साथ रखे हुए हैं। यह काम और कठिन इसलिए हो गया है कि वरिष्ठ राजनीतिक पद अब दिवंगत शाह अब्दुलअज़ीज़ (इब्न सऊद) के बेटों से आगे बढ़ कर उनके पोतों के हाथ आने लगे हैं। इनमें गवर्नर का पद और अहम मंत्रालयों का नियंत्रण शामिल है।
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स्वास्थ्य की चिंता

शाही परिवार में शाह सलमान का अपना सुदायरी गुट कभी सात भाइयों का एक बेहद शक्तिशाली गुट था लेकिन अब इसमें भी आंतरिक होड़ शुरू हो गई है। भाइयों के बेटे अब खुद के शक्ति केंद्र बनाने लगे हैं।

शाह का स्वास्थ्य भी एक चिंता का विष्य है। ऐसी खबर है कि उन्हें कम से कम एक बार दिल का दौरा पड़ चुका है और उसके बाद से उनके बांए हाथ ने काम करना कम कर दिया है।

पत्रकारों का कहना है कि वह हाल की बैठकों में सजग और जानकार की तरह सामने आए हैं लेकिन उनकी सहनशीलता को लेकर चिंता है। शाह बनने के बाद उन्होंने अपने सौतेले भाई मुक़रिन बिन अब्दुलअज़ीज़ को नया युवराज बनाने का ऐलान किया है। मुक़रिन दिवंगत शाह अब्दुलअज़ीज़ के जीवित सबसे छोटे बेटे हैं।
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