फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोशल मीडिया में यहां कामयाब रही कांग्रेस

विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भाजपा के हमले की काट के लिए लाया गया फेकू हैशटेग कामयाब साबित हो रहा है। ट्विटर पर पप्पू के खिलाफ फेकू के हैशटेग से भले ही सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता हो लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इससे लोगों में दिलचस्पी पैदा हुई और उसे खासा प्रचार भी मिला।
विज्ञापन


ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) में सोशल मीडिया एंड पॉलिटिक्स पर आयोजित एक चर्चा में कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पप्पू बनाम फेकू हैशटेग में काफी लोगों ने दिलचस्पी दिखाई और यह चर्चा का विषय रहा।

इससे सोशल मीडिया के बड़े खेल में पार्टी की एंट्री हुई। हालांकि राजनीतिक बहस का स्तर घटाने के आरोप में इसकी आलोचना भी हुई।

कांग्रेस देर से आई पर दुरुस्‍त आई

चतुर्वेदी ने कहा कि सोशल मीडिया में पार्टी देर से आई लेकिन वह इस पर अपनी नीतियों का बचाव करने और सरकार की उपलब्धियों को बताने में सफल रही। साथ ही वह विपक्ष के प्रोपगंडा से लोहा ले सकी।

पार्टी, भाजपा की ओर से विकास के सबसे अच्छे मॉडल के तौर पर प्रचारित किए जा रहे गुजरात विकास मॉडल की सच्चाई बताने में कामयाब रहा।

लोगों ने कांग्रेस के तर्कों पर ध्यान दिया और इसे माना भी। यह चर्चा पूर्व टीवी पत्रकार शैली चोपड़ा की किताब ‘द कनेक्ट पॉलिटिक्स इन द एज ऑफ सोशल मीडिया’ पर आधारित थी।
विज्ञापन

राहुल की गैर मौजूदगी से नुकसान

चोपड़ा ने कहा कि सोशल मीडिया पर कभी-कभी खराब भाषा और अभद्रता के मामले देखने को मिलते हैं लेकिन इस माध्यम को नियंत्रित करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में वेब का इस्तेमाल करने वाले 45 फीसदी लोग राजनीति पर चर्चा करते हैं।

सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की गैर मौजूदगी ने इस पर नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल को बढ़त दिलाने में मदद की है। ट्विटर इंडिया के न्यूज, पॉलिटिक्स एंड गवर्नमेंट के प्रमुख राहिल खुर्शीद ने कहा कि आम आदमी के लिए सोशल मीडिया मजबूत हथियार बन चुका है और इसकी उपयोगिता को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

तक्षशिला इंस्टीट्यूशन के सह-संस्थापक और सोशल मीडिया विशेषज्ञ नीतिन पई का कहना था कि सोशल मीडिया पर विमर्श का घटता स्तर चिंता का विषय हो सकता है लेकिन आम आदमी की आवाज को जगह देने वाले किसी माध्यम का धीरे-धीरे ही विकास होता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें