हरियाणा सरकार ने पंजाब पर आरोप लगाया है कि वह रंजीत सागर बांध परियोजना से अधिक जल का इस्तेमाल करके अन्य राज्यों को उनकी हिस्सेदारी से वंचित कर रहा है।
जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में हरियाणा सरकार ने कहा है कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन करने के लिए अन्य राज्यों के हिस्से में आने वाले पानी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
हरियाणा और पंजाब के बीच जल बंटवारे का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। हरियाणा का कहना है कि रंजीत सागर बांध पर पंजाब का एकाधिकार है। इस परियोजना से बिजली का उत्पादन वह सिर्फ अपने इस्तेमाल के लिए करता है। हालांकि इस बिजली पर अन्य राज्यों का भी हक है।
अतिरिक्त जल को अन्य राज्यों के साथ साझा करने के बजाए पानी को बर्बाद होने दिया जा रहा है। रंजीत सागर बांध परियोजना का पानी नीचे की ओर गिरता है। माधोपुर-व्यास लिंक परियोजना में यह पानी इकट्ठा नहीं किया जा सकता।
भाखड़ा-व्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बर्बाद हो रहे पानी का आकलन किया है। हर रोज एक लाख 425 क्यूसेक पानी पाकिस्तान में बह रहा है। यह आंकड़े पांच दिसंबर, 2012 और 14 जनवरी, 2013 के बीच एकत्र किए गए। इस संबंध में 16 जनवरी, 2013 को बीबीएमबी ने पंजाब के सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को एक पत्र भी लिखा था।
शाहपुर कांदी बांध परियोजना को लेकर भी हरियाणा ने अपने पड़ोसी राज्य पर शर्तों का पालन न करने का आरोप लगाया है। अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद पंजाब परियोजना जारी रखे हुए है। पंजाब योजना आयोग द्वारा तय की गई अनिवार्य शर्तों का भी उल्लंघन कर रहा है।
परियोजना के लिए ऑनलाइन निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं। केंद्र सरकार ने भी शाहपुर परियोजना को धन मुहैया न कराने की बात सुप्रीम कोर्ट से कही है, लेकिन इसके बावजूद पंजाब को फंड रिलीज किया जा रहा है। योजना आयोग ने शाहपुर परियोजना के लिए अप्रैल 2008 में 2285 करोड़ रुपये के निवेश को हरी झंडी दी थी, लेकिन साथ ही शर्त रखी थी कि परियोजना 31 मार्च, 2015 तक पूरी होनी चाहिए। हरियाणा और राजस्थान के साथ विवाद को सुलझाने की भी हिदायत दी थी। विवाद का निपटारा किए बिना केंद्र सरकार पंजाब को रकम उपलब्ध करा रही है।