गुजरात में पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को स्थानीय अदालत ने राजद्रोह मामले में रिमांड को खारिज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
अतिरिक्त सिटी सिविल जज एचए पंड्या ने पुलिस की तीन दिन की रिमांड के आवेदन को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पुलिस से एक पखवाड़े बाद हार्दिक को अदालत में पेश करने को कहा।
इससे पहले हार्दिक पर कथित रूप से युवाओं को आत्महत्या करने की बजाय पुलिस वालों की हत्या करने की सलाह दी थी। हार्दिक ने विपुल पटेल से कहा था कि यदि तुम्हारे में इतनी हिम्मत हैं तो जाओ और कुछ पुलिस वालों को मार दो।
पटेल कभी आत्महत्या नहीं करते। इससे पहले विपुल ने आंदोलन के समर्थन में आत्महत्या करने की घोषणा की थी।
'बोतलें फोड़ो और टायरों को आग लगाकर हाईवे ठप करो'
पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल एकदिवसीय मैच से एक दिन पहले अशांति फैलाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपने सहयोगियों को खाली बोतलें फोड़ने और टायरों को आग लगाकर सभी हाईवे ठप करने को कहा था।
इस मामले में हार्दिक पटेल के खिलाफ पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें उनकी फोन पर हुई बातचीत का ब्योरा भी है। एफआईआर के मुताबिक, 25 अगस्त को अहमदाबाद में हुई पाटीदार समाज की रैली से पहले भी आंदोलन से जुड़े नेताओं के बीच भड़काने वाली बातचीत हुई थी।
इसमें अनुसार आरोपियों ने एक घंटे के भीतर पूरा गुजरात जला देने की बात कही थी। इसमें वह अपने सहयोगियों को तोड़फोड़ और आगजनी के लिए उकसा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने करीब 40 कॉल इंटरसेप्ट किए हैं, जिनका टेप जारी किया गया है। हार्दिक पटेल और उनके सहयोगियों के बीच ज्यादातर बातचीत गुजराती में हुई है। इसमें ट्रेनों में आग लगाने की कोशिश से लेकर बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने की बात किए जाने का सिलसिलेवार जिक्र है।
एक कॉल में हार्दिक अपने साथियों से कह रहे हैं कि अगर हमें शिवाजी, भगत सिंह और सरदार पटेल जैसा बनना है, तो हममें विधानसभा में बम रखने की हिम्मत भी होनी चाहिए।
पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और पांच अन्य लोगों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के गंभीर आरोपों के तहत दर्ज 27 पृष्ठों वाली प्राथमिकी में कहा गया है कि हार्दिक ने अपने समुदाय के लोगों को गुजरात सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए हिंसक तरीके अपनाने के लिए उकसाया था।
जांच एजेंसी ने हार्दिक के भाषणों और टेलीफोन पर हुई बातचीत का जो ब्योरा पेश किया है, उसमें उन्होंने आंदोलकारियों को राज्य सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए भड़काया था।