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हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी

Tue, 06 Nov 2012 10:48 PM IST
मुंबई/एजेंसी
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15वीं सदी के सूफी संत हाजी अली की दरगाह में अब महिलाएं दाखिल नहीं हो सकेंगी। मुंबई की इस मशहूर दरगाह में संत की कब्र तक महिलाओं के जाने पर रोक लगा दी है। दरगाह प्रशासन के इस फैसले का जोरदार विरोध भी शुरू हो गया है। इस दरगाह में हर साल हजारों की संख्या में जायरीन पहुंचते हैं।
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हालांकि हाजी अली दरगाह ट्रस्ट के ट्रस्टी रिजवान मर्चेंट ने इस विरोध को खारिज करते हुए कहा कि महिलाओं के दरगाह के खुले परिसर में आने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन उन्हें पवित्र गुंबद के अंदर दाखिल होने की इजाजत नहीं होगी। इस फैसले को मर्चेंट ने शरई कानून के तहत जायज बताया।

एक अन्य ट्रस्टी सुहैल खानद्वानी ने कहा कि शरई कानून के मुताबिक कोई भी महिला कब्रिस्तान या कब्र तक नहीं जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि 80 फीसदी महिलाएं इस फैसले से सहमत हैं। लेकिन दरगाह प्रशासन के इस फैसले का भारतीय मुसलिम महिला आंदोलन ने जोरदार विरोध किया है।
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संगठन की संस्थापक नूरजहां साफिया नियाज ने कहा कि वह इस मुद्दे को महाराष्ट्र सरकार के समक्ष उठाएंगी। उन्होंने इस फैसले को गैर इसलामिक करार दिया। उनके मुताबिक मामला तब सामने आया जब अगस्त में एक महिला को दरगाह में कब्र तक जाने से रोक दिया गया। मालूम हो कि हाजी अली दरगाह को कई फिल्मों में भी दिखाया गया है।

दरगाह में महिलाओं के जाने से बेपर्दागी होती है। हाजी अली दरगाह प्रबंध कमेटी का फैसला बिल्कुल सही है क्योंकि शरई कानून में भी महिलाओं के कब्र पर जाने पर रोक लगी हुई है।
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राशिद कासमी, दारुल उलूम के मुफ्ती

हम दरगाह प्रशासन के इस फैसले के पक्ष में नहीं हैं। हमने देशभर की जानी मानी मुसलिम शख्सियतों से बात की है कि वे इस फैसले का विरोध करें।
दिग्विजय सिंह, कांग्रेस

जाति या लिंग के आधार पर लोगों में भेदभाव करना गलत है। इस फैसले पर फिर से विचार करते हुए इसे वापस लिया जाना चाहिए।
मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा
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