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हाजी अलीः सरकार ने भी की महिलाओं की वकालत

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बांबे हाईकोर्ट में मंगलवार को हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश संबंधित याचिका पर सुनवाई होगी। न्यायाधीश वीएम कनाडे और न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे की खंडपीठ उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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जिसमें हाजी अली ट्रस्ट के ऐतिहासिक दरगाह पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायाधीश वीएम कनाडे ने महाधिवक्ता श्रीहरि अनाय से इस मामले पर सरकार का पक्ष रखने को कहा है।

इसके बाद सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह भी दरगाह में महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में है। हालांकि तीन फरवरी को सुनवाई के दौरान बांबे हाईकोट ने इस बात के संकेत भी दिए थे कि इस मसले पर कोई भी अंतिम फ़ैसला देने से पहले वह सुप्रीम कोर्ट के केरल के सबरीमला मंदिर पर आने वाले फ़ैसले का इंतज़ार करेगा।
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वहीं हाजी अली दरगाह में प्रवेश संबंधी जनहित याचिका दाखिल करने वाली भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की नूरजहां नियाज ने हाल ही में बीबीसी से कहा था, “हाजी अली दरगाह में महिलाओं पर लगी पाबंदियों को हटाने की हमारी पुरानी मांग है।
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बांबे हाइकोर्ट में चल रही है मामले की सुनवाई

इसके लिए हमने मुंबई उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है, हमारी मांग है कि अब सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर महिलाओं के साथ न्याय करे।”

वहीं दूसरी ओर दरगाह ट्रस्ट के वकील शोएब मेमन ने कहा है, “संविधान की धारा 26 के मुताबिक ट्रस्ट को अपने धार्मिक कार्य करने का मूलभूत अधिकार प्राप्त है। इसमें और कोई बाहरी व्यक्ति या संस्था दख़लंदाज़ी नहीं कर सकती है।”

बाबा हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह का निर्माण 1631 में हुआ और यह आस्था के केंद्र के तौर पर दुनिया भर में मशहूर है। इस दरगाह पर सभी धर्मो के लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए बाबा से मन्नते मांगते हैं।

इस दरगाह में 2012 से पहले महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी नहीं थी लेकिन बाद में दरगाह ट्रस्ट ने महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी। दरअसल पिछले कुछ दिनों में हाजी अली दरगाह और केरल के सबरीमला मंदिर के अलावा महाराष्ट्र के शनि शिगनापुर मंदिर में भी महिलाओं के प्रवेश का मामला गरमाया हुआ है।
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