आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गवर्नर की ओर से अनुमति न दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
एक पूर्व पत्रकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गवर्नर के इस कदम पर सवाल उठाया है।
पूर्व पत्रकार किरण तिरोड़कर ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सीबीआई को उन मामलों में सरकारी सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने में गवर्नर की सहमति और अनुमति की जरूरत नहीं है, जो न्यायपालिका की निगरानी में हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट की धारा 6-ए के तहत जो मामले अदालत की निगरानी में हैं उनमें सरकारी सेवकों के खिलाफ सीबीआई को गवर्नर की अनुमति की जरूरत नहीं है।
याचिका के मुताबिक सीबीआई ने अशोक चह्वाण के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गवर्नर को जो दस्तावेज सौंपे हैं वे पक्के हैं। इनमें कहा गया है कि चह्वाण ने अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स की अनुमति देने के मामले में गलत फैसला किया। इसके बदले चह्वाण की सास और एक करीबी रिश्तेदार को आदर्श हाउसिंग सोसाइटी में फ्लैट दिए गए।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के गवर्नर के शंकरनारायणन ने अशोक चह्वाण के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी। इससे खफा तिरोड़कर ने शुक्रवार को हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
अशोक चह्वाण पर आदर्श हाउसिंग सोसाइटी में फ्लोर स्पेस इंडेक्स बढ़ाने की अनुमति देने के आरोप हैं। साथ ही उन्होंने राजस्व मंत्री रहने के दौरान सोसाइटी में 40 फीसदी फ्लैट सिविलयन के लिए मंजूर कर दिए थे। जबकि ये फ्लैट कारगिल शहीद की विधवाओं और दूसरे सैन्यकर्मियों के लिए थे।