जाने-माने शायर व गीतकार गुलजार अपनी पाकिस्तान यात्रा बीच में ही छोड़कर भारत लौट आए हैं। उनकी इस तरह वतन वापसी पर विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि प्रसिद्ध गीतकार ने सुरक्षा कारणों से अपनी यात्रा बीच में ही रद्द कर दी। हालांकि गुलजार के साथ पाकिस्तान गए निर्माता-निर्देशक विशाल भारद्वाज ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि गुलजार साहब के भारत लौटने के पीछे कोई सियासी या सुरक्षा कारण नहीं हैं।
इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्च्चायोग के अधिकारियों ने भी पाक मीडिया की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने साफ किया कि यात्रा के दौरान भारतीय मिशन का कोई भी अधिकारी गुलजार के संपर्क में नहीं था। यह उनकी निजी यात्रा थी। दौरा बीच में रद्द करने के कारणों का खुलासा करते हुए भारद्वाज ने बताया कि गुलजार ने यह यात्रा पाकिस्तानी पंजाब के दीना स्थित अपने पैत्रिक गांव कालरा पहुंचने के बाद रद्द की।
जन्मभूमि पहुंचकर भावुक हुए गुलजार
बकौल भारद्वाज, अपने पैत्रिक गांव पहुंचने के बाद गुलजार बहुत भावुक हो गए थे। सबसे पहले वह संरक्षक और जाने-माने शायर अहमद नदीम कासिमी की कब्र पर भी गए। इसके बाद वह अपनी जन्मभूमि दीना गए। 70 साल बाद वह यहां पहुंचे थे। गांव से होटल पहुंचने के बाद वह काफी भावुक और असहज हो गए।
गुलजार और भारद्वाज को वहां मेहर अली और शेर अली के साथ एक कव्वाली भी रिकॉर्ड करनी थी, जिसे भारद्वाज की फिल्म ‘देध इश्किया’ में शामिल किया जाना था, लेकिन यह रिकॉर्डिंग कैंसल हो गई। भारद्वाज ने बताया कि इसके बाद हमने भारत वापस लौटने का निर्णय लिया।
अफजल की फांसी से बिगड़े हालात
लाहौर में साहित्यिक गतिविधियों से जुडे़ कुछ लोगों ने दावा किया था कि नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के बाद उपजे हालात के मद्देनजर सुरक्षा कारणों के चलते उन्होंने अपनी यात्रा अधूरी छोड़ दी। हालांकि इस्लामाबाद में भारतीय अधिकारियों ने इससे इनकार किया है। भारद्वाज ने कहा कि गुलजार जैसे ही बेहतर महसूस करेंगे उसके बाद जल्द ही दोबारा हमारी पाकिस्तान यात्रा की योजना है।