प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही अब शिक्षा क्षेत्र को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए पिछले पांच सालों में वह केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए जमीन तक नहीं उपलब्ध करा सके।
मानव संसाधन मंत्रालय में इस महीने होने जा रही एक उच्च स्तरीय बैठक के एजेंडा नोट में कहा गया है कि गुजरात में पांच सालों से अस्थाई भवन में विश्वविद्यालय चल रहा है। जबकि इसी दौरान दूसरे प्रदेशों में स्वीकृत विश्वविद्यालयों के निर्माण का काम काफी प्रगति पर है।
शिक्षा सचिवों की बैठक में उठेगा मामला
मानव संसाधन मंत्रालय ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर केंद्र की आगे की रणनीति पर चर्चा और लंबित मामलों में फैसले के लिए 17 जून को राज्यों के शिक्षा सचिवों की बैठक बुलाई है।
हर प्रदेश में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की योजना के तहत यूपीए-1 की सरकार ने एक दर्जन राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्वीकृति प्रदान की थी।
वर्तमान में गुजरात को छोड़कर सभी राज्यों में विश्वविद्यालय के लिए न केवल जमीन उपलब्ध करा दी गई है बल्कि कुछ राज्यों में नए कैंपस में ही पढ़ाई शुरू हो चुकी है। वहीं गुजरात में विश्वविद्यालय के लिए जमीन तक चिन्हित नहीं हो सका है।
कई और राज्यों में जमीन को लेकर विवाद
एक साल पहले बिहार के लिए स्वीकृत केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए राज्य सरकार ने तत्काल जमीन उपलब्ध करा दी जिससे वहां परिसर में निर्माण भी शुरू हो गया है।
हिमाचल प्रदेश में स्वीकृत केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए धर्मशाला में 400 एकड़ और देहरा में 200 एकड़ जमीन आवंटित कर दी है लेकिन इस जमीन के वन विभाग से भू उपयोग परिवर्तित न होने के कारण अभी निर्माण नहीं शुरू हो पाया है।
इसी तरह गढ़वाल (उत्तराखंड) और तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के कैंपस से जुड़े कुछ मामलों पर भी बैठक में अधिकारी फैसला लेंगे।