गुजरात में नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के मामले में कांग्रेस पार्टी को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी ने उन्हें ललकारना शुरू कर दिया है।
आम आदमी पार्टी ने रविवार से राज्य भर में झाडू यात्रा शुरू कर दी है जो 30 जनवरी को ख़त्म होगी। पार्टी ने राज्य की सभी 26 लोक सभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान पहले ही कर दिया है।
ये यात्राएं अधिकतर ग़रीब इलाक़ों में निकाली जा रही है जहा पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष के अनुसार अब तक की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। ग़रीब तबक़े के अलावा छात्र और युवा वर्ग भी पार्टी को समर्थन दे रहा है।
आप की झाड़ू यात्रा
लेकिन क्या भाजपा 'आप' को गंभीरता से ले रही है? क्या इस समय किसी भी पार्टी के पास नरेंद्र मोदी से उनके अपने सियासी अखाड़े में दंगल करने का साहस है?
भाजपा के गुजरात यूनिट के प्रवक्ता सौरभ पटेल से जब मैंने आम आदमी पार्टी की यात्रा पर बात करने के लिये फोन किया तो उन्होंने कहा वह 'आप' के बारे में कोई बात नहीं करना चाहते।
लेकिन दूसरी तरफ 'आप' के प्रवक्ता आशुतोष कहते हैं कि वह राज्य में भाजपा को चुनौती देने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। वहा के पत्रकारों के अनुसार 'आप' की झाडू यात्रा को भाजपा गंभीरता से ले रही है जिसका उदाहरण है पार्टी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और एसएमएस भेजने की कोशिश को तेज़ी से आगे बढ़ाना।
गुजरात में सेंध
खुद नरेंद्र मोदी के भाषणों में अब 'आप' की चर्चा होने लगी है जबकि अभी तक उन्होंने केवल कांग्रेस को ही अपनी आलोचना का निशाना बनाया था। गुजरात के बारे में ये कहा जाता है कि वहा नरेंद्र मोदी ने बहुत काम किया है और वहा उनकी लोकप्रियता अच्छे प्रशासन और आर्थिक प्रगति के कारण बढ़ी है। वहा केवल मोदी की ही चलती है।
गुजरात में सेंध लगाना 'आप' के लिए मुश्किल चुनौती होगी। लेकिन शायद ये विधान सभा के बारे में अधिक सही होगा। लोक सभा की तस्वीर अभी तक थोडी अलग रही है। गुजरात में साल 2004 के आम चुनावों में भाजपा को कुल 26 में से 14 सीटें मिली थीं जबकि साल 2009 में इससे एक सीट अधिक लेकिन भाजपा इस चुनाव में 2004 की जीती हुई पांच सीटें हार गई थी।
मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जहा भाजपा ने विधान सभा के चुनाव में हर बार कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है वहीं लोक सभा में वो कांग्रेस को पूरी तरह से मात देने में विफल रही है। खबर ये है कि राज्य में 'आप' की झाडू यात्रा के बाद भाजपा के खेमे में खलबली तो नहीं मची लेकिन पार्टी ने इसे हलके में लेने के बजाय गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।
मुद्दों पर सर्वेक्षण
अब तक भाजपा ये समझ रही थी कि कांग्रेस ने पहले ही हार मान ली है और मोदी के अपने गढ़ में पार्टी को चुनौती देने वाला अब कोई नहीं। लेकिन अब भाजपा को एहसास हो रहा है कि हालात बदल रहे हैं। 'आप' ने भाजपा और मोदी सरकार को सीधे निशाने पर नहीं लिया है बल्कि छोटे-छोटे मुद्दों पर उन्हें घेरने की कोशिश की है।
उदाहरण के तौर पर 'आप' ने अहमदाबाद नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों की हडताल का समर्थन किया है और उनकी मांगों को पूरा करने में उनके साथ है। इसी तरह से 'आप' ने भ्रष्टाचार, कॉलेजों में दान, ऊची फीस और महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति जैसे मुद्दों पर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
इससे मोदी सरकार को चुभन हो सकती है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण ये है कि 'आप' ऐसे मुद्दे उठा रही है जिससे आम आदमी सीधा प्रभावित होता है।