संसद के शीतकालीन सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल पारित होने की प्रबल संभावना है। केंद्र सरकार का दावा है कि 32 में से 30 राजनीतिक पार्टियां जीएसटी बिल का समर्थन कर रही हैं। दूसरी तरफ, बीएसपी, टीएमएसी, एनसीपी और जदयू जैसी पार्टियों के जीएसटी बिल के समर्थन में उतरने के बाद कांग्रेस पर भी दबाव बढ़ गया है। लिहाजा, कांग्रेस के भी तेवर नरम पड़ते दिख रहे हैं। विपक्षी दलों के बदलते रुख को देखते हुए जीएसटी बिल के इस सत्र में पारित होने की प्रबल संभावना बन गई है।
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा है कि जीएसटी बिल को लेकर सरकार ने उनसे संपर्क किया है। हमने सरकार को ठोस औपचारिक प्रस्ताव लाने को कहा है। अगर सरकार उन्हें यह प्रस्ताव देती है तो हम पर उस पर विचार कर सकते हैं। जीएसटी बिल के मुद्दे पर कांग्रेस अभी तक अपनी बात पर अड़ी हुई थी। मगर पार्टी अब सरकार को नया प्रस्ताव लाने को कहने के साथ ही इस पर विचार करने की बात कह रही है। बृहस्पतिवार को मायावती ने जीएसटी बिल का समर्थन किया। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सरकार ने उन्हें भरोसा दिया है कि यह देश हित में है। इसलिए हम इसका समर्थन करेंगे।
तृणमूल कांग्रेस ने भी जीएसटी का समर्थन करने के संकेत दिए हैं। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि जीएसटी को उनकी पार्टी का समर्थन है। जदयू ने भी जीएसटी बिल पर समर्थन जताया है। सपा पहले से ही इसके समर्थन में है। ऐसे में कांग्रेस अलग-थलग पड़ गई है। साथ ही पार्टी पर दबाव भी बढ़ गया है। वामदल इस बिल के विरोध में है। अन्नाद्रमुक भी जीएसटी बिल के विरोध में है। मगर इसके विरोध में ज्यादा दूर जाने के पक्ष में नहीं है।