फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदुस्तान को एकजुट रखने वाले महान सपूत थे पटेल

Sat, 15 Dec 2012 09:44 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
बिना खून बहाए भारत को एकता के बंधन में बांधने वाले 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज (15 दिसंबर) पुण्यतिथि है। पटेल की देशभक्ति और साहस को हर भारतीय सलाम करता है।
विज्ञापन


आजादी के बाद सरदार पटेल ने भारत की एकता और अखंडता कायम रखने में अहम भूमिका निभाई। देशी रियासतों को भारत में मिलाने का साहसिक कार्य सरदार पटेल के प्रयासों से ही संभव हो पाया।

खुद महात्मा गांधी ने पटेल के बारे में कहा था, 'रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे तुम ही हल कर सकते थे।' कहा तो यह भी जाता है कि यदि कश्मीर का निर्णय पंडित जवाहर लाल नेहरू के बजाय पटेल करते तो फिर बात ही कुछ और होती।
विज्ञापन


31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में जन्मे पटेल बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। पिता झवेरभाई पटेल और मां लदबा की चौथी संतान पटेल ने लंदन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की। अहमदाबाद में वकालत करने के दौरान ही वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए।

अंग्रेजों की विरूद्ध लड़ाई में 'खेड़ा संघर्ष' को भला कौन भूल सकता है। उस समय गुजरात के खेड़ा भयंकर सूखा पड़ा था। सूखे में भी अंग्रेज सरकार ने किसानों से जबरन कर लेना चाहा। पटेल ने किसानों के साथ मिलकर अन्याय का कड़ा विरोध किया। आखिर सरकार को उनकी मांगों के आगे झुकना पड़ा। यह सरदार पटेल की बड़ी सफलता थी। बारडोली के इस सरदार ने महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान दिया।

आजादी के बाद प्रांतीय कांग्रेस समितियों के समर्थन के बावजूद पटेल ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया। बाद में उन्हें उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का कार्यभार सौंपा गया। बिना खून बहाए देशी रियासतों के एकीकरण केवल पटेल ही कर सकते थे। 15 दिसंबर 1950 को भारत के इस महान सपूत का निधन हो गया।
विज्ञापन


भारत के इस अनमोल धरोहर को सरकार ने 1999 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। उनके साहसिक कार्य को हमेशा याद किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें