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सईद-मलिक जुगलबंदी की सरकार कराएगी जांच

Tue, 12 Feb 2013 12:13 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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कश्मीरी के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की इसलामाबाद में भारत के मोस्ट वांटेड दुश्मन जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद के साथ जुगलबंदी ने पाकिस्तान की दोस्ती की दलीलों की पोल फिर खोल दी है। इससे हैरान भारत का मानना है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में हिंसा का नया दौर शुरू करने के लिए हर मुमकिन कोशिशें कर रहा है।
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26/11 के मास्टरमाइंड सईद के साथ मलिक की इस जुगलबंदी को रोकने की कूटनीतिक नाकामी के बाद सरकार ने इस मामले की जांच कराने का ऐलान किया है। मगर भारतीय पासपोर्ट पर इसलामाबाद गए यासीन मलिक पर क्या कार्रवाई की जाएगी इसे लेकर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से लेकर विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद तक के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है।

यासीन मलिक-सईद की भारत विरोधी इस जुगलबंदी में कूटनीतिक गच्चा खाने के बाद सरकार की जवाबी कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर गृहमंत्री शिंदे ने केवल इतना कहा कि हम इसकी जांच कराएंगे। मगर मुंबई के गुनहगार नंबर एक सईद के मलिक को समर्थन देते हुए उकसावे की कार्रवाई पर पाकिस्तान से क्या कहा जाएगा? शिंदे के पास इसका कोई जवाब नहीं था। खुर्शीद ने भी बस यही कहा कि गृह मंत्रालय इसकी पड़ताल कर रहा है।
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हालांकि सोमवार देर शाम गृह मंत्रालय के शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भले ही औपचारिक रूप से पाकिस्तान को मलिक-सईद की बैठक पर कुछ नहीं कहा गया है। मगर बैक चैनल डिप्लोमेसी के जरिए पाकिस्तान को भारत ने ऐतराज जताते हुए यह साफ कर दिया है कि सईद को कश्मीर के मुद्दे पर इसलामाबाद में भूख हड़ताल पर बैठे मलिक के पास जाने की इजाजत देकर पाक ने अविश्वास की ताजा खाई को और बढ़ा दिया है।

पाक को बताया गया है कि मलिक को सईद के साथ बिठाकर संवेदनशीलता और कूटनीतिक मर्यादाओं की सीमा उसने फिर तोड़ दी है। जबकि सैनिक का सिर काटने की बर्बरता के बाद भी संबंधों को सामान्य बनाने की पहल के तहत भारत इन दिनों कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान जाने की इजाजत दे रहा है।

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने यह आशंका भी जाहिर की है कि सईद-मलिक की मुलाकात पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान और आईएसआई की कश्मीर में हिंसा का नया दौर शुरू करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हो सकती है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से मिल रही सूचनाओं के आधार पर गृह मंत्रालय इस आशंका को नकार नहीं रहा कि अफजल गुरू की फांसी के बाद भी पाकिस्तान में बैठे भारत विरोधी तत्व घाटी में लोगों को भड़काने की कोशिशें तेज कर सकते हैं।
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