गैंगरेप के खिलाफ राजधानी दिल्ली समेत देशभर में बढ़ते गुस्से के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दुष्कर्म के जघन्य मामलों में सजा को सख्त करने के लिए कानून में बदलाव की कवायद तेज कर दी है। इसी के तहत रविवार रात सरकार ने मौजूदा कानून की समीक्षा के लिए आयोग गठित करने की अधिसूचना जारी कर दी। इसका ऐलान करते हुए गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बताया कि सरकार इस मुद्दे पर बेहद गंभीर है।
मीडिया से बातचीत में शिंदे ने कहा कि मौजूदा कानून की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग में जस्टिस लीला सेठ (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस) और पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रहमण्यम भी सदस्य हैं। यह आयोग 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। इस रिपोर्ट में आयोग सुझाव देगा कि मौजूदा कानून में क्या बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि यौन हिंसा की पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाया जा सके। वह दुष्कर्म के जघन्य अपराधों में सजा बढ़ाने पर भी राय देगा।
शिंदे ने यह भी कहा कि इंडिया गेट पर रविवार को प्रदर्शनकारियों के हिंसा करने के बाद ही उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं। उनकी यात्रा के समय ऐसे कोई प्रदर्शन नहीं होने चाहिए। हम छात्रों के साथ सहयोग करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ऐसी तस्वीर पेश नहीं की जानी चाहिए, जिससे दुनिया में देश की आलोचना होने लगे। इसलिए मैं छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।
सरकार फास्ट ट्रैक जांच पर सहमत
जनता से मिल रहे सुझावों को ध्यान में रखते हुए सरकार बलात्कार जैसे यौन अपराधों की सुनवाई फास्ट ट्रैक जांच पर सहमत हो गई है। साथ ही सरकार पुलिस तैनाती में भी वृद्धि करने को तैयार है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए सादे कपड़े में पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह के साथ रविवार को मुलाकात के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप मामले में 14 मांगे रखीं, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। सूत्रों के अनुसार सरकार यौन उत्पीड़न की परिभाषा को छेड़छाड़ से बलात्कार और तेजाब फेंकने तक विस्तार देने पर भी सहमत हो गई है। सरकार यौन उत्पीड़न संबंधी कानून को सख्त करने और पीसीआर वैन से पेट्रोलिंग बढ़ाने पर भी सहमत हो गई है। साथ ही मौके पर पहुंचने में देरी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार सरकार नागरिक सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती और सार्वजनिक स्थलों पर और लाइटिंग की व्यवस्था करने तथा महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर विशिष्ट इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर सहमत हो गई है। साथ ही सरकार ने प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने का वादा किया है।
राष्ट्रपति की बेटी ने की फांसी की मांग
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटियां भी इस जघन्य घटना से सकते में हैं। इन सभी ने गैंगरेप के आरोपियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।
राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दोषियों के लिए फांसी की मांग करते हुए कहा कि ये लोग जानवर से भी गए गुजरे हैं। इन्हें जानवर कहना तो जानवरों की भी तौहीन करना है। शर्मिष्ठा ने साथ ही कहा कि मौजूदा समय में हालात इतने खराब हो गए हैं कि रात में आठ बजे के बाद ही घर से निकलने में डर लगने लगता है।
वहीं इस घटना पर उपराष्ट्रपति की बेटी नूरिया अंसारी ने कहा कि अपराधियों को तब तक अपनी गलती का अहसास नहीं होगा जब तक उन्हें उनके अपराध के लिए कड़ी सजा नहीं दी जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि देश के कानून में जरूरी बदलाव किए जाएं।
जब गृह मंत्री की बेटी परिणती शिंदे से घटना के बारे में सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध पर लगाम लगने के लिए देश के कानून को बदलना होगा। क्योंकि अगर कानून नहीं बदलेगा तो लोगों की मानसिकता भी नहीं बदलेगी।