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मुस्लिमों की फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग पर होगा विचार

Tue, 02 Apr 2013 11:38 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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देश की विभिन्न जेलों में बंद ‘निरपराध’ मुस्लिम युवकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन पर विचार करेगी। मुस्लिम संगठन लगातार इस बात की मांग करते रहे हैं।
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सांसदों और नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यहां कहा, ‘हम इस मांग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार करेंगे।’

भाकपा नेता एबी वर्द्धन के नेतृत्व में शिंदे से मिले नेताओं ने पिछले दो साल या उससे ज्यादा समय से जेल में बिना अपराध के जेल में कैद मुस्लिमों की जमानत पर तत्काल रिहाई के लिए एक 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।
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इसमें उन्होंने गृहमंत्री से मांग की कि तत्काल घोषणा करें, कितने समय में फास्ट ट्रैक अदालतों को गठित किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल शिंदे से पहले उनके जूनियर कैबिनेट सहयोगी आरपीएन सिंह से मिला और अपना मांगपत्र सौंपा।

हाल ही में शिंदे ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने ऐसे प्रस्ताव को अपना समर्थन देने का वादा किया था, जिसमें आतंकवाद फैलाने के आरोपों का सामना कर रहे ‘निर्दोष’ मुस्लिमों की रिहाई के लिए विशेष अदालतों के गठन की बात हो।

उन्होंने ‘निर्दोषों’ को फंसाने वाले अधिकारियों को भी कड़ी सजा देने की बात कही थी। उन्होंने राज्यों से भी ‘निर्दोषों’ की रिहाई के लिए बातचीत करने का वादा किया। तमाम राजनीतिक दल ‘झूठे’ आरोपों में मुस्लिम युवकों को फंसाए जाने को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

यूपी में 400 निर्दोष रिहा
उत्तर प्रदेश में पिछले साल समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि वह राज्य की जेलों में बंद उन मुस्लिम युवाओं को रिहा कर देगी, जिन पर आतंकवाद फैलाने के ‘झूठे’ आरोप हैं। पिछले महीने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने दावा किया था कि उनकी पार्टी ने वादा निभाया है और अभी तक वह राज्य में 400 अल्पसंख्यक ‘निर्दोषों’ को जेलों से आजाद कर चुकी है।
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