सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति मामले को लेकर एक महीने पुरानी नरेंद्र मोदी सरकार और न्यायपालिका एक दूसरे के आमने-सामने आ खड़ी हुई हैं।
जजों की नियुक्ति में वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम की अनदेखी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा केंद्र सरकार पर जमकर बरसे।
उन्होंने सरकार के कदम को एकतरफा करार देते हुए अपनी नाराजगी जताई। साथ ही पूर्व सॉलिसिटर जनरल के नाम को अलग करने पर कार्यपालिका के रुख को अनुचित बताया।
'न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं'
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा के बयान पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।
जस्टिस बीएस चौहान के विदाई समारोह के दौरान चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि उन्होंने गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम अलग किए जाने पर अपनी आपत्ति जताई थी लेकिन सरकार ने मेरी जानकारी के बगैर एकतरफा कदम उठाया। यह उचित नहीं था।
इस विवादास्पद मामले में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शीर्ष न्यायपालिका इस मसले पर बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस के तौर पर मैंने और मेरे चार वरिष्ठ सहकर्मियों की कोलेजियम ने चार सबसे हुनरमंद लोगों को चुना था। हमने सरकार को इन चार नामों को 6 मई को नियुक्त करने के लिए भेजा था।
मेरी जानकारी के बगैर लिया फैसला: चीफ जस्टिस
चीफ जस्टिस ने कहा कि मेरे 28 जून को विदेश से वापस लौटने पर एक फाइल कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से मेरे समक्ष पेश की गई।
इसमें कोलेजियम की ओर से भेजे गए चार नामों की सिफारिशों में से तीन के नाम पर अनुमति प्रदान कर दी गई थी। जबकि गोपाल सुब्रह्मण्यम के नाम को अलग कर दिया गया था। ऐसा एकतरफा तरीके से किया गया, जो मेरी जानकारी से बाहर और संज्ञान के बिना था।
'सुब्रह्मण्यम के पत्र से गहरा धक्का लगा'
चीफ जस्टिस ने उनके विदेश में होने के दौरान पत्र सार्वजनिक किए जाने पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें सुब्रह्मण्यम के पत्र से गहरा धक्का लगा।
उन्होंने बताया कि विदेश से लौटने के बाद वह गोपाल सुब्रह्मण्यम से मिले और 75 मिनट तक बातचीत की। इस दौरान पूर्व सॉलिसिटर जनरल से जज पद की उम्मीदवारी छोड़ने का फैसला वापस लेने को कहा लेकिन 29 जून को सुब्रह्मण्यम ने छह लाइनों का एक पत्र लिखकर उम्मीदवारी छोड़ने के फैसले पर कायम रहने की बात कही।
चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि पत्र के बाद औपचारिक तौर पर कोलेजियम की सिफारिश वापस लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।
चीफ जस्टिस की नाराजगी पर सरकार की सफाई
वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम मामले में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा के नाराजगी जताए जाने के बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार रात को अपनी सफाई पेश की।
सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सुब्रह्मण्यम के मामले को इसलिए आगे नहीं बढ़ाया गया क्योंकि उन्होंने खुद अपना नाम वापस ले लिया जबकि उनके मामले में सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जजों की नियुक्ति के लिए चार नाम भेजे थे। सूत्रों ने बताया कि मानक प्रक्रिया के तौर पर सभी चारों मामलों में सत्यापन किया गया। इनमें से तीन मामले सही थे लेकिन सुब्रह्मण्यम के मामले में पुनर्विचार के लिए कोलेजियम को वापस भेज दिया गया।
इस बीच सुब्रह्मण्यम ने खुद अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इससे उनकी उम्मीदवारी खत्म हो गई और इस वजह से मामला आगे नहीं बढ़ सका।