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ना-पाक नवेद को दबोचने वाले जीजा-साले का होगा सम्मान

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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि उधमपुर में बीएसएफ की बस पर हमला करने वाले आतंकी को जीवित पकड़ने वाले ग्रामीणों को सम्मानित किया जाएगा।
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उधमपुर में बुधवार को बीएसएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले पर राज्यसभा में बयान देते हुए उन्होंने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर सरकार से निवेदन करेंगे कि आतंकी को पकड़ने वाले ग्रामीणों को सम्मानित किया जाए।

गुरुवार को राज्यसभा में हमले की जानकारी देते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि जिन दो आतंकियों ने बीएसएसफ के काफिले पर हमला किया था, उनमें जीवित पकड़े गए आतंकी ने अपना नाम नवेद उर्फ उस्मान बताया। मारे गए आतंकर का नाम नोमान उर्फ मोमिन था। नोमान पाकिस्तान के भावलपुर का था।
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उन्होंने बताया कि आतंकी पाकिस्तान के फैसलाबाद से आए थे। हमले में बीएसएफ के दो जवान शहीद हो गए, जबकि 11 जवान घायल हो गए। जवानों और ग्रामीणों के साहस की सराहना करते हुए राजनाथ ने कहा कि जवान ने जिस साहस का परिचय दिया, उसके लिए उन्हें सम्मानित किया जाएगा। आतंकी को पकड़ने वाले ग्रामीणों को सम्मानित करने के लिए राज्य सरकार से निवेदन किया जाएगा।
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जीजा-साले की आतंकी को पकड़ने में अहम भूमिका

उल्लेखनीय है कि बुधवार को ग्रामीणों ने जिस आतंकी को जीवित पकड़ा उसे लेकर सुरक्षाबलों का कहना है कि वह लश्कर का सदस्य है। यह आतंकी सुरक्षा बलों और अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की साजिश के तहत आया था।

देखने में 20-22 साल का लग रहा आतंकी अपनी उम्र महज 16 साल बता रहा है। सुररक्षाबलों के मुताबिक वह पंजाबी और उर्दू जानता है। पहाड़ी बोली भी बोल और समझ लेता है। माना जा रहा है कि जम्मू संभाग में 20 साल बाद किसी विदेशी आतंकी को जिंदा पकड़ा गया है।

इस आतंकी को भारत के हाथ पाक के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत भी माना जा रहा है। नवेद को पकड़ने में राकेश कुमार शर्मा और विक्रम जीत शर्मा ने अहम भूमिका निभाई। ये दोनों रिश्ते में जीजा और साला हैं। बुधवार सुबह करीब सात बजे उधमपुर स्थित उत्तरी कमांड मुख्यालय से 16 किमी दूर नरसू नाले के पास नेशनल हाईवे पर दो पाकिस्तानी आतंकियों ने बीएसएफ की एक बस पर हमला किया।
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