रिटेल में एफडीआई और प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दों पर अपनों के तीखे तेवरों का सामना कर रही केंद्र सरकार की लोकसभा में यूपीए के अहम घटक डीएमके ने सोमवार को किरकिरी करा दी। नारियल उत्पादकों की दुर्दशा पर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार के जवाब को गलत बताते हुए डीएमके के सदस्य सदन से बर्हिगमन कर गए। उस समय कृषि राज्यमंत्री चरणदास महंत प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब दे रहे थे। डीएमके ने न सिर्फ जवाब पर असंतोष जताया बल्कि जवाब कैबिनेट मंत्री द्वारा न आने पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की।
डीएमके के टी.आर. बालू ने तमिलनाडु के नारियल उत्पादकों की दुर्दशा पर रखे गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर कृषि राज्य मंत्री महंत के जवाब देने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब कैबिनेट मंत्री को देना चाहिए। ऐसा नहीं करना नारियल किसानों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जो सवाल किया गया है महंत उसका जवाब नहीं दे रहे हैं। हम उन्हें नहीं सुनेंगे। डीएमके सदस्यों के इस रवैये पर हैरानी जताते हुए महंत ने कहा कि यह क्या है, मैं जवाब दे रहा हूं। हर बात का जवाब दूंगा। इस तरह का गुस्सा दिखाने का क्या मतलब है।
महंत ने कहा कि नारियल और मिलिंग खोपरा की बहुत अधिक गिरती हुई कीमतों से उत्पन्न स्थिति से सरकार अवगत है। इस साल नारियल और इसके उत्पादों विशेष रूप से नारियल तेल के मूल्यों में अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू मंडियों में भी असाधारण गिरावट आई है। केंद्र सरकार तमिलनाडु सहित देश के सभी नारियल उत्पादकों के हितों की रक्षा करने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रही है। वर्ष 2008 से अब तक सरकार इसके समर्थन मूल्यों में चालीस फीसदी तक बढ़ोतरी कर चुकी है।
इसके पूर्व ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर अपनी बात रखते हुए बालू ने नारियल किसानों को राज सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार जो सहायता पाम आयल के आयात पर दे रही है अगर वही देश के नारियल किसानों को दी जाए तो इससे न सिर्फ खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि किसानों को भी उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी। उन्होंने देश के नारियल पेड़ों में फैली बीमारी पर चिंता जताते हुए कहा कि चार पांच साल के बाद भी देश के वैज्ञानिक और नारियल अनुसंधान केंद्र इसका उपचार नहीं कर पाए हैं।