आधार कार्ड योजना की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल उठाने के बाद अब केंद्र सरकार आधार कार्ड को कानूनी रूप देने के लिए एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है।
सरकार ने मंगलवार को एक बिल का ड्राफ्ट तैयार किया है जो आधार कार्ड जारी करने वाली भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को कानूनी आधार देगा। इसके बाद यह कार्ड अनिवार्य हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि आधार कार्ड न होने पर किसी नागरिक को कोई भी सेवा या लाभ लेने से नहीं रोक जा सकता है। आधार कार्ड एक स्वैच्छिक योजना है।
आधार कार्ड यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजना के लिए भी जारी किया गया था ताकि नकली पहचान के आधार पर लोग सेवाओं का लाभ न उठाएं। किसी व्यक्ति को एक ही आधार कार्ड जारी हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण के इस बिल को तैयार करते समय दो प्रमुख आपत्तियों पर ध्यान दिया गया है। जिनमें आधार कार्ड का कानूनी आधार न होना और लोगों की निजता का उल्लंघन करना शामिल है।
इस बिल को कैबिनेट की स्वीकृति के बाद शीत सत्र में संसद में लाया जाएगा।
दुरुपयोग पर भी सख्त
यह बिल साल 2010 में संसदीय पैनल के खारिज कर दिए गए बिल से बेहतर है और नामांकन से लेकर पूरी प्रक्रिया को कानूनी कवर देता करता है।
आधार कार्ड बनाने के लिए यूआईडीएआई के साथ भारत सरकार निजी एजेंसियों को काम देती है। यह एजेंसियां लोगों की जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक जानकारी जुटाती हैं। अगर निजी जानकारियों का दुरुपयोग किया जाता है तो उसे तीन साल की सजा और अधिकतम एक करोड़ का जुर्माना होने का प्रावधान भी ड्राफ्ट में रखा गया है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस ने भी कहा कि आधार कार्ड अनिवार्य नहीं किया जा सकता क्योंकि अभी इसका काम संतोषजनक स्तर तक नहीं पहुंचा है।