मोदी सरकार अध्यादेशों के जरिये सरकार चलाने को लेकर बेशक निशाने पर है लेकिन इसने कांग्रेस की रणनीति को बैकफुट पर धकेल दिया है।
अगर अध्यादेशों का बजट सत्र में विरोध हुआ तो हिंदू विरोधी छवि की चिंता से जूझ रही कांग्रेस को अब विकास विरोधी होने के आरोपों से दो-चार होना पड़ सकता है।
बीमा क्षेत्र और कोयला खदानों से जुड़े बिलों पर अध्यादेश के बाद भूमि अधिग्रहण पर अध्यादेश लाकर सरकार ने अपनी मंशा जता दी है। लिहाजा कांग्रेस को कम समय के भीतर ही यह तय करना होगा कि वह सरकार के आर्थिक सुधारों के पक्ष में खड़ी है या विपक्ष में।
हालांकि संसद में कानून बनाने के बजाय अध्यादेश के जरिये शासन चलाने को लेकर मोदी सरकार को आलोचना भी झेलना पड़ रहा है।
सरकार के कदमों का बचाव करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा का कहना है कि अर्थिक सुधारों को लेकर सरकार वचनबद्ध है।
यूपीए सरकार के पिछले दस साल के कुशासन से भारत की अर्थव्यवस्था आईसीयू में चली गई थी। आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए मोदी सरकार हर संभव कदम उठाएगी।