प्रधानमंत्री कार्यालय प्रमुख परियोजनाओं के फास्ट ट्रैक क्लीयरेंस और उन्हें लागू होने में देरी को खत्म करने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (ईएसी) की भूमिका में कटौती के पक्ष में है।
परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी मिलने में इस कमेटी की अहम भूमिका होती है। पीएमओ ने पर्यावरण और वन मंत्रालय को 31 अगस्त तक ऐसे नियम जारी करने को कहा है, जिससे पर्यावरण क्लीयरेंस की प्रक्रिया में तेजी आए और इसकी जटिलता खत्म हो जाए।
बिजली और कोयला सेक्टर की नई परियोजनाओं और इनके विस्तार के लिए यह जरूरी है। दरअसल पर्यावरण क्लीयरेंस न मिलने से अटकी परियोजनाओं की वजह से आर्थिक विकास दर को नुकसान पहुंचा है और निवेश का माहौल खराब हुआ है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक ऐसा बुनियादी पैमाना तैयार करने की सलाह दी है, जिस पर खरा उतरना पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए जरूरी हो। दरअसल इस पैमाने पर हासिल की गई स्कोरिंग को ही पर्यावरण क्लीयरेंस हासिल करने की कसौटी मानने को कहा गया है।
इसमें कहा गया है कि अगर परियोजना इस पैमाने पर ऊंचा स्कोर हासिल करती है तो इसे एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी को न भेज कर सीधे पर्यावरण और वन मंत्रालय के पास भेज दिया जाए। पीएमओ ने कहा है कम स्कोरिंग वाली परियोजनाओं को ही एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी कमेटी को भेजा जाए ताकि वह इसका मूल्यांकन कर उचित सिफारिश कर सके।
साथ ही पीएमओ ने यह भी कहा है कि एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी पर्यावरण मंजूरी के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस (टीओआर) देते वक्त जलापूर्ति, राख निपटान और भूजल स्तर को लेकर नई और बार-बार किए जाने वाले अध्ययनों की सिफारिश न करे।
विस्तार वाली परियोजनाओं के बारे में पीएमओ ने कहा है कि अगर समान लीज वाले इलाके में खनन परियोजनाओं की क्षमता में विस्तार हो रहा हो तो जन सुनवाई से छूट मिलनी चाहिए। खास कर तब जब यह सुनवाई पहले हो चुकी हो।
पीएमओ चाहता है कि पर्यावरण और वन मंत्रालय की वन सलाहकार कमेटी यानी एफएसी भी वन क्लीयरेंस प्रस्तावों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी की तरह ही बैठकें करे। इसके साथ पीएमओ ने पर्यावरण मंत्रालय को ऐसी संभावनाएं ढूंढ़ने के लिए कहा है जिनमें बिजली परियोजनाओं के लिए वन्यजीव क्लीयरेंस तेज क रने के कदम उठाए जा सकें।