सरकार ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन पाक दर्शकों को मल्टी सिटी वीजा दिए जाने पर गृह मंत्रालय पशोपेश में है। इस संवेदनशील मुद्दे पर फैसले के लिए मंत्रालय ने अलग से एक कमेटी गठित की है। संयुक्त सचिव की अगुवाई में काम करने वाली यह कमेटी तय करेगी कि पाकिस्तान से आने वाले क्रिकेट प्रेमियों को एक ही शहर का वीजा दिया जाए या उन सभी शहरों का जहां मैच होने हैं। पाकिस्तान और भारत के बीच तीन वनडे और 2 टी-20 मैच होने हैं। भारत इस सीरीज के लिए पाकिस्तान के 5000 क्रिकेट प्रेमियों को वीजा जारी करने पर विचार कर रहा है।
ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब मैच देखने आए कई पाकिस्तानी दर्शक अपने मुल्क लौटे ही नहीं। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में मोहाली में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए विश्व कप सेमीफाइनल देखने आए 14 पाकिस्तानी दर्शक अब तक लापता हैं। इससे पहले भी आए कई दर्शक देश के विभिन्न शहरों में अपनी पहचान बदल कर छुपे हुए हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में कम से कम छह पाकिस्तानियों को वापस भेजा गया है।
सुरक्षा के लिहाज से कुछ संदिग्ध पाकिस्तानी दर्शकों पर पासपोर्ट एक्ट के तहत मुकदमा भी चलाया जा रहा है। यही वजह है कि इस बार सरकार वीजा देने के मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है।मालूम हो कि पाकिस्तानी अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने पूछताछ के दौरान कहा था कि दिल्ली में भारत-पाक क्रिकेट मैच के दौरान लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों ने कई अहम स्थानों की रेकी की थी, जिसमें नेशनल डिफेंस कॉलेज भी शामिल है।
26/11 को चार साल बीत जाने के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के मकसद से पाकिस्तानी टीम को भारत आने की इजाजत दी गई है। सूत्र का कहना है कि क्रिकेट में दोनों देशों के दर्शकों की क्रिकेट के लिए दीवानगी और इस वजह से आपसी प्रतिस्पर्धा विज्ञापन बाजार को भी भारी मुनाफा देती है। साथ ही इससे बीसीसीआई और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को भी भारी आर्थिक लाभ होगा। आर्थिक स्थिति के लिहाज से बुरी तरह लचर पीसीबी के लिए यह सीरीज संजीवनी का काम करेगी।