संसद के शीत सत्र से पहले तृणमूल सांसद की गिरफ्तारी के बाद ममता बनर्जी भले ही उखड़ गई हों मगर मोदी सरकार जरूरत पड़ने पर संसद में अहम विधायी कामकाज में तृणमूल कांग्रेस का समर्थन हासिल करने के प्रति आश्वस्त है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिया है कि अपने दर्जन भर सांसदों के चिट फंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के शिकंजे में फंसे होने के चलते तृणमूल सुप्रीमो अब केंद्र सरकार से सीधे टकराव लेने से परहेज करेंगी।
कई विधेयकों को राज्यसभा में पारित कराने के लिए सरकार को तृणमूल की मदद की जरूरत पड़ सकती है। उधर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मुलायम सिंह और मायावती की तरह ममता केंद्र के सामने हथियार नहीं डालेंगी। सीबीआई ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शृंजॉय बोस को कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया। इसे लेकर ममता बनर्जी ने शनिवार को केंद्र पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया और साथ ही मोदी सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की चुनौती दे दी।
ममता ने आरोप लगाया कि नेहरू की विरासत को लेकर कांग्रेस के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के चलते ही केंद्र के इशारे पर सीबीआई ने उनके सांसद को गिरफ्तार कर लिया। मगर दूसरी तरफ ममता के कड़े रुख के बाद सरकार में शीर्ष स्तर पर राय बन रही है कि इतने सांसदों के चिट फंड में फंसे होने के चलते ममता टकराव की राजनीति ज्यादा दिनों तक मोल नहीं ले सकती हैं।