प्रमोशन में आरक्षण बिल को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच संतुलन बनाने के लिए सरकार के मैनेजरों का फार्मूला आखिरकार कामयाब रहा। सरकार के मैनेजरों ने एक तरफ सपा को बहिष्कार के जरिए चेहरा बचाने का मौका दिया, तो दूसरी तरफ प्रमोशन बिल पर आगे बढ़ने का बसपा से किया हुआ वादा भी पूरा कर लिया गया।
सरकार ने पर्दे के पीछे रिटेल में एफडीआई पर समर्थन के बदले बसपा से राज्यसभा में इस संशोधन बिल को पास कराने का करार किया था। सभी पक्षों का चेहरा बचाते हुए संशोधन बिल का रास्ता निकालने के लिए सरकारी मैनेजरों ने सारी स्क्रिप्ट तैयार कर ली थी।
इसके लिए बुधवार सुबह सभी दलों ने नेताओं के साथ राज्यसभा सभापति हामिद अंसारी की अनौपचारिक बैठक में सपा को एसीआर के मौजूदा प्रावधानों को जारी रखने की पेशकश की गई। सपा से यह भी कहा गया कि वह इस पेशकश को मान कर चाहे तो अनुच्छेद 335 की प्रासंगिकता बनाए रखे या फिर मौजूद बिल के साथ इस संबंध में संशोधन पेश कर दे। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक सपा इस पर नहीं मानी।
कांग्रेस के मैनेजरों ने शोर शराबे के बीच मार्शल के जरिए सपा सांसदों को सदन से बाहर करने की विकल्प देकर डील फिक्स करने की कोशिश की। लेकिन इस पर सभापति अंसारी और भाजपा नहीं माने। इन्होंने दलील दी कि इससे गलत परंपरा की शुरुआत हो जाएगी।
अंत में बात तय हो गई कि सपा सांसदों के हंगामे की सूरत में नियम 255 और 256 के तहत उनके चुनिंदा सांसदों को सदन से बाहर चले जाने को कहा जाएगा। इसी बहाने सभी सांसद सदन के बर्हिगमन कर जाएंगे। सपा इस पर मान गई और सदन में ठीक ऐसा ही हुआ।