जन लोकपाल बिल आंदोलन से उठकर चुनावी राजनीति में शानदार प्रदर्शन करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) के कड़े तेवर और अन्ना हजारे के दोबारा शुरु हुए अनशन ने यूपीए सरकार को ठंढे बस्ते में पड़े लोकपाल बिल को बाहर निकालने का दिखावा करने पर मजबूर कर दिया है।
सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा के सभापति को लोकपाल बिल को पेश करने की प्रक्रिया शुरु करने बावत नोटिस दे दिया है। मगर कांग्रेस की करारी हार और टूजी पर जेपीसी रिपोर्ट के ताजा विवाद के मद्देनजर मौजूदा शीत सत्र में बड़े कामकाज के कोई आसार नहीं दिख रहे। इस लिहाज से लोकपाल बिल चालू सत्र में ही पारित कराने की कोशिश करने की सरकार की घोषणा बेदम है।
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट पेश करने के दौरान पूछे गए सवाल में कहा कि बिल को लेकर सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है। सरकार जल्द से जल्द इस बिल को पास करवाना चाहती है। शिंदे के मुताबिक सरकार ने राज्यसभा से इस बिल को बिना वक्त गंवाए पेश करने को कहा है।
शिंदे या कार्मिक राज्यमंत्री नारायणसामी चाहे दावे करें मगर सरकारी सूत्रों के मुताबिक हालांकि इस सत्र में लोकपाल बिल पास होने की कोई संभावना नहीं है। गौरतलब है कि लोकसभा से इस बिल को हरी झंडी मिल चुकी है। लेकिन राज्यसभा में यूपीए का बहुमत नहीं होने की वजह से यह बिल अटक गया था। गौरतलब है कि यह बिल फिलहाल सलेक्ट कमेटी के पास है।
मगर चुनाव से पहले सियासी मजबूरी में सरकार की कोशिश है कि लोगों को लोकपाल बिल पर अपनी गंभीरता का एहसास कराने का संदेश दिया जाए। यही वजह है कि बिल पास होने की नामुकिन स्थितियों के बावजूद सरकार ने राज्यसभा में इसे लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ताकि अन्ना हजारे और जनलोकपाल समर्थकों के बिल नहीं लाने के सवालों पर कम से कम यह जवाब दिया जा सके कि सरकार ने कोशिश की मगर संसद के गतिरोध की वजह से वह इसे सिरे नहीं चढ़ा पायी।