संसद के मानसून सत्र के अंतिम हफ्ते की कार्यवाही भी हंगामे की बारिश में धुलनी तय है। सरकार और विपक्ष दोनों ही आर या पार के मूड में हैं।
सरकार ने जहां आर्थिक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को कानूनी जामा पहनाने का मोह छोड़ कर विपक्ष पर जवाबी हमले की रणनीति बनाई है।
दूसरी तरफ, विपक्ष ने भी सरकार को चैन न लेने देने की रणनीति तैयार की है। इस क्रम में सोमवार को लोकसभा में विपक्ष की योजना स्पीकर के 25 सांसदों के निलंबन के फैसले पर सवाल उठाने की है।
नहीं पारित हुआ एक भी विधेयक
इसके अलावा विपक्ष ने विहिप से जुड़ी साध्वी प्राची के खिलाफ विशेषाधिकार
हनन का नोटिस देने की रणनीति भी बनाई है। उल्लेखनीय है कि साध्वी प्राची ने
बीते हफ्ते संसद में एक-दो आतंकवादियों के बैठे होने की बात कही थी।
सरकार
ने भी विपक्ष को सदन में आड़े हाथों लेने और चर्चा से भागने का आरोप लगाने
की रणनीति बनाई है। उल्लेखनीय है कि सत्र में ललित गेट और व्यापम घोटाले
पर हुए हंगामे और सरकार और विपक्ष के बीच पैदा हुए गतिरोध के कारण एक भी
विधेयक पारित नहीं हो सका है।
इन विधेयकों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी),
भूमि अधिग्रहण जैसे आधा दर्जन आर्थिक सुधारों से जुड़े अहम विधेयक शामिल
हैं।
पलटवारों के बीच अटके कई विधेयक
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर
जारी सियासी महाभारत के बीच सरकार और विपक्ष में सत्र की बलि लेने की सहमति
बन गई लगती है। विपक्ष के तीखे और हमलावर रुख और तीखी असहमति के बीच सरकार
ने अपने अहम बिलों की चिंता छोड़ विपक्ष पर सियासी पलटवार करने का निर्णय
कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार पर सियासी महाभारत के कारण जहां
मानसून सत्र में राज्य सभा में अब तक कोई कामकाज नहीं हो पाया है, वहीं
लोकसभा में विपक्ष के 25 सांसदों के निलंबन के बाद सरकार कुछ कामकाज निपटा
पाई है।
चूंकि राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चल रही, इसलिए इस दौरान लोकसभा
में पारित बिलों के भविष्य पर भी ग्रहण लग गया है। कांग्रेस
सूत्रों के मुताबिक सांसदों का निलंबन खत्म होने के बाद सोमवार को विपक्ष
के नौ दल कार्यवाही में हिस्सा तो लेंगे, मगर स्पीकर के फैसले पर सदन के
अंदर ही सवाल उठाएंगे।
सरकार के एक मंत्री के अनुसार, सोमवार को सरकार
विपक्ष पर चर्चा से भागने और चर्चा में शामिल होने की चुनौती देगी।