अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर असम के दार्जिलिंग में शनिवार से अनिश्चितकालीन बंद की शुरुआत हो गई। इसका आह्वान गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने किया है।
बंद के चलते दार्जिलिंग हिल्स में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। सभी दुकानें, मार्केट, स्कूल, कॉलेज, सरकारी और निजी कार्यालय, बैंक, पोस्ट आफिस नहीं खुले। इसके अलावा सड़कों पर वाहनों भी नहीं नजर आए।
दार्जिलिंग में शनिवार सुबह 6 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल के शुरू होने के बाद हिंसा की कोई नई वारदात नहीं हुई।
कस्बे के विभिन्न हिस्सों में सीआरपीएफ की एक बटालियन को तैयार किया गया। इसके अलावा महिला सीआरपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया है।
इस बीच दिल्ली में मौजूद जीजेएम के छह सदस्यीय टीम ने विभिन्न दलों के सांसदों से मुलाकात की और उन्हें अलग गोरखालैंड राज्य की मांग के बारे में अवगत कराया।
इस टीम ने कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी से भी मुलाकात की कोशिश की। इस बीच जीजेएम के सहायक महासचिव बिनाय तमांग ने अपने ट्रेड यूनियन नेता सरोज तमांग की हत्या के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।
वहीं दूसरी ओर तृणमूल नेता राजेन मुखिया ने कहा कि उनकी पार्टी दार्जिलिंग में हिंसा नहीं चाहती है। हम यहां शांति चाहते हैं।
असम के कार्बी आंगलोंग में नहीं थमी हिंसा
अलग राज्यों की मांग को लेकर असम में जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित कार्बी आंगलोंग जिला हुआ है। यहां पर हिंसा की नई वारदातों में कुछ सरकारी कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया गया जबकि कुछ जगह पर रेलवे ट्रैक ही उखाड़ दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि आंदोलनकारियों ने पशु चिकित्सा, कृषि, सिंचाई, समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) के कार्यालय पर शुक्रवार रात में आग लगा दी।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने दीफू और डालडोली स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक के एक हिस्से को ही हटा दिया। इसके चलते ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं। पश्चिमी कार्बी आंगलोंग जिले में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू शनिवार को भी जारी रहा।
वहीं जिले के दीफू में कर्फ्यू में सुबह 8 बजे से तीन घंटे की ढील दी गई। हिंसाग्रस्त इलाकों में सेना फ्लैग मार्च कर रही है।