सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी, 2007 में गोरखपुर में हुए दंगे के मामले में सांसद योगी आदित्यनाथ, मेयर अंजू चौधरी, विधायक राधा मोहन, एमएलसी वाईडी सिंह और भाजपा नेता शिव प्रसाद शुक्ला के खिलाफ कार्यवाही पर रोक हटा ली है।
साथ ही कोर्ट ने मेयर चौधरी की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने इस मामले में सीजेएम को पुनर्विचार कर एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद हिंदू संगठनों से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ नामजद और एक हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई खामी नहीं है। इसलिए अदालत हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अंजू चौधरी की याचिका को खारिज करती है।
पीठ ने चौधरी की उस दलील को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट ने इस मामले में दूसरे पक्ष को सुने बिना ही सीजेएम को पुनर्विचार कर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए। उनका तर्क था कि दंगों के मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के आधार को सीजेएम ने जुलाई में इसलिए रद्द कर दिया था, क्योंकि दंगों से संबंधित कई एफआईआर पहले ही अलग-अलग थानों में दर्ज की जा चुकी थीं।
इसके बाद सितंबर, 2008 को हाईकोर्ट ने सीजेएम को आदेश जारी किए और पांच लोगों के खिलाफ नामजद और एक हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई, जबकि पहले से ही इस मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज कर चुकी है और सीबीसीआईडी मामले की जांच कर रही है।
सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में मेयर चौधरी की याचिका पर कार्यवाही पर 19 दिसंबर, 2008 को रोक लगा दी थी, जो याचिका खारिज किए जाने के बाद स्वत: हट गई।
गौरतलब है कि गोरखपुर के दंगों के मामले में हाईकोर्ट ने 26 सितंबर, 2008 को सीजेएम को पुनर्विचार और एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी किया था। इससे पहले जुलाई में सीजेएम ने एफआईआर की मांग पर आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था।