प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। हाईकोर्ट ने प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों से पढ़ाई के अलावा दूसरा कोई काम नहीं लेने का निर्देश दिया है।
एडवोकेट सुनीता शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने शिक्षकों से लिए जा रहे राशनकार्ड सत्यापन के कार्य पर रोक लगा दी है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों से चुनाव ड्यूटी, जनगणना और आपदा को छोड़कर कोई भी गैर शैक्षणिक कार्य नहीं लिया जा सकता है। इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करते हुए खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 21(ए) में अनिवार्य शिक्षा मौलिक अधिकार है।
सरकार छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने को बाध्य है। कोई भी ऐसा कार्य जो इस उद्देश्य की पूर्ति में बाधा बनता है अनुचित होगा। राशन कार्ड सत्यापन का कार्य मुख्य सचिव द्वारा जारी सर्कुलर के तहत शुरू कराया गया।