कुछ दिनों पहले देश के वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने लोगों से अपील की थी कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए लोग सोने की खरीदी से परहेज करें। सोने के दाम गिरते गए और उसकी खरीदी बढ़ती गई। लोग सोना खरीदने से नहीं माने तो अब ज्वैलर्स ने सरकार की सलाह पर सोना बेचना ही बंद कर दिया है।
सरकार की सलाह के बाद देशभर में आभूषण खुदरा विक्रेताओं ने सोने के सिक्कों और छड़ों की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है।
फिर घटे सोने के दाम, 27 हजार से आया नीचे
व्यापारियों ने छह महीनों के लिए यह रोक लगाई है। ऐसे में सोने के सिक्कों और छड़ों की कीमत भी बढ़ सकती है।
खुदरा व्यापारियों से सोना आयात न करने की अपील करने वाले ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन कहना है कि इस कदम से सोने के आयात पर अंकुश लगाने और चालू खाते के घाटे को कम करने में मदद मिल सकती है।
टीबीजेड, गीतांजलि, तनिष्क और मुकेश अंबानी की रिलायंस जेवल्स जैसे सोने के बढ़े व्यापारियों ने यह फैसला लिया है।
वित्त मंत्री ने की थी अपील
कुछ समय पहले वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी क्योंकि सोने की मांग बढ़ने उसकी खरीद बढ़ रही है जिससे देश के चालू खाते का घाटा बढ़ रहा है। सरकार और रिजर्व बैंक ने बैंकों से सोने की ब्रिकी में कमी करने के लिए भी कहा था। इसके बाद अनिल अंबानी की रिलायंस कैपिटल ने सोना खरीदने पर रोक लगा दी थी।
सरकार ने इस संबंध में और भी कदम उठाए हैं जिसके चलते जून माह में सोने की मांग धीरे-धीरे गिरी है।
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के सदस्य अशोक मीणावाला ने कहा कि पिछले महीने सरकार के साथ हुई मीटिंग में सोने के आयात पर प्रतिबंध का फैसला लिया गया है। उद्योग के तौर पर अगर हम खुद पर सोने की ब्रिकी कम करते हैं तो उससे आयात में भी कमी आएगी।
गीतांजली के सीईओ संजीव अग्रवाल का कहना है कि यह मसला सुलझ जाने तक वह सोने की बिक्री को बढ़ावा नहीं देंगे। उनका कहना है कि पिछले दस सालों में सोने के आभूषणों की मांग कम या ज्यादा होती रही है लेकिन निवेश की मांग कई गुना बढ़ी है।
भारत दुनियाभर में सबसे बड़ा 860 टन सोने का आयातक है। यहां सोने की ब्रिकी में सोने के सिक्कों और छड़ों की बिक्री कुल एक तिहाई है। पिछले चार सालों में यहा सोने के सिक्कों और छड़ों की मांग 150 प्रतिशत तक बढ़ी है।