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सुशासन में उतरवाए जा रहे लड़कियों के काले दुपट्टे

Thu, 11 Oct 2012 01:12 PM IST
चंदन/इंटरनेट डेस्क
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अधिकार यात्रा शुरू से ही विवादों में घिरी हुई है। खुद को बिहार में विकास का मसीहा बताने वाले नीतीश कुमार को इस यात्रा के दौरान लोगों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
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जनविरोध का आलम यह है कि लोग उन पर जूते-चप्पल फेंक रहे हैं, नारेबाजी कर रहे हैं और काले झंडे दिखा रहे है। इस तरह के जनविरोधों से आजिज हो कर उनकी सुरक्षा-व्यवस्था में लगा प्रशासन भी अब अजीबोगरीब और शर्मनाक फैसले लेने पर उतर आया है। इसकी बानगी यह है कि अब नीतीश की सभा में महिलाओं और लड़कियों के काले दुपट्टे तक उतरवा लिए जा रहे है, ताकि कोई मुख्यमंत्री को काला झंडा न दिखा सके।

नवादा में बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मना करने के बावजूद कार्यक्रम में आई लड़कियों के काले दुपट्टे पुलिस ने उतरवा लिए। इस वजह से कई महिलाएं जनसभा से वापस लौट गईं। सुरक्षा के नाम पर प्रशासन द्वारा की जा रही इस तरह की शर्मनाक हरकत से लोगों में और आक्रोश बढ़ रहा है। जबकि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगी पुलिस सिर्फ काले कपड़े ही तलाशती रहती है। हैरानी की बात तो यह है कि ऐसी शर्मनाक हरकतें अधिकारियों द्वारा अति उत्साह में की जा रही हैं।
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उल्लेखनीय है कि नीतीश का उनकी अधिकार यात्रा में लगातार विरोध किया जा रहा है। बिहार में पिछले सात साल के दौरान ऐसा पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोई यात्रा नकारात्मक वजहों से ज्यादा चर्चा में आई हो। इसका सिलसिला 23 सितंबर को शुरू हुआ, जो अब तक जारी है। हर घटना पर नीतीश की प्रतिक्रिया कुछ यही रही कि यह सब विपक्ष की साजिश है, क्योंकि उसके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है।
 
दूसरी तरफ नीतीश कुमार के धुर-विरोधी लालू प्रसाद यादव हाथ आए इस बड़े मुद्दे को छोड़ने के मूड में बिलकुल नहीं हैं। उन्होंने नीतीश पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि क्या लोग अपने काले बाल भी हटवा कर मुख्यमंत्री की सभा में जाए। लालू ने कहा कि अधिकार यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री की सभा में काले कपड़े पर पाबंदी लगा दी गई है। इसकी आड़ में बिहार की महिलाओं और लड़कियों का काला दुपट्टा ले लिया जा रहा है, उनकी बेइज्जती की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में लोकतंत्र नहीं, पुलिस तंत्र का राज कायम हो गया है।

सवाल यह है कि लोकतंत्र में विरोध को दबाने का यह तरीका कितना जायज है? महज इसलिए कि कोई मुख्यमंत्री को काला झंड़ा न दिखा दे, क्या महिलाओं के काले दुपट्टे उतरवाना शर्मनाक नहीं है? क्या है आपकी राय?
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