पांच माह पहले पंजाब के लुधियाना से अगवा करके लाई गई लड़की को धर्म परिवर्तित कराकर परतापुर के गांव कांशी में जबरन रखा गया। सूचना पर जब उसका पिता परतापुर थाने पहुंचा, तो आरोपी उसे भी उठा ले गए। पुलिस ने लड़की और उसके पिता को बरामद कर लिया। पुलिस ने लड़की को पिता के सुपुर्द कर दिया, लेकिन आरोपियों के खिलाफ बिना कार्रवाई किए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
शुक्रवार को बिहार निवासी एक व्यक्ति थाने पहुंचा। उसने बताया कि वह लुधियाना में नौकरी करता है और वहीं पर परिवार सहित रहता है। पड़ोस में रहने वाली एक विधवा के परिवार से उसकी जान पहचान हो गई। पांच माह पहले उसकी 12 वर्षीय बेटी और विधवा का परिवार दोनों गायब हो गए। जिसकी उसने लुधियाना कोतवाली में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
किशोरी के पिता ने बताया कि उसे किसी ने फोन पर सूचना दी है कि उसकी बेटी को परतापुर (मेरठ) क्षेत्र के कांशी निवासी बसपा नेता और उसके साथी ने जबरन अपने पास रखा हुआ है। इसी दौरान जब किशोरी का पिता परतापुर थाने के बाहर बैठा था, तभी कथित बसपा नेता व उसका दोस्त उसे जबरन गांव ले गए।
इस पर पुलिस भी पीछे-पीछे उनके गांव पहुंची। पुलिस ने आरोपियों के घर दबिश देकर किशोरी और उसके पिता को छुड़ा लिया। किशोरी ने बताया कि अपहरणकर्त्ताओं ने उसका नाम और धर्म बदल दिया, साथ ही धार्मिक कार्यों के लिए मजबूर करते थे।
इतना कुछ होने के वाबजूद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने किशोरी को उसके पिता के सुपुर्द करके पूरे मामले को ही छिपाने का प्रयास किया। इस संबंध में एसओ परतापुर का कहना है कि मामला पंजाब का है, इसलिए कार्रवाई पंजाब पुलिस ही करेगी।