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नहीं रहे बांग्लादेश बनवाने वाले हीरो जनरल जैकब

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1971 के बांग्लादेश युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले ले। जनरल (रिटायर्ड) जैकब का दिल्ली में निधन हो गया है। वह 92 साल के थे। जैकब गोवा और पंजाब के राज्यपाल भी रहे।
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वह जैकब ही थे जिन्हें मानिकशॉ ने आत्मसमर्पण की व्यवस्था करने ढाका भेजा था।

उन्होंने ही जनरल नियाजी से बातकर उन्हें हथियार डालने के लिए राजी किया था। जैकब ने 1971 के अभियान पर दो पुस्तकें लिखी हैं। साथ ही वे गोवा और पंजाब के राज्यपाल भी रहे। जैकब का जन्म कलकत्ता (कोलकाता) में वर्ष 1923 में हुआ था।
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द्वितीय विश्व युद्ध-1965 की लड़ाई में भी रहा योगदान

सेना में 36 साल के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध और 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी बहादुरी दिखाई।

1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में उन्होंने ही पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण की शर्तें सुनाई। जिसमें ये शर्त थी कि पाकिस्तानी सेना न सिर्फ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करेगी बल्कि बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के सामने भी आत्मसमर्पण होगा।

पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी के पास अकेले ढाका में 26 हजार 400 सैनिक थे। इसके बावजूद उन्हें 3000 भारतीय सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था।। इसी जंग के बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ जो उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था।

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