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जानिए कैसे वायरस बन गए 'गेल'

Tue, 28 May 2013 03:12 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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इंटरनेट की दुनिया में क्रिस गेल का एक बेहद खतरनाक चेहरा सामने आया है। आईपीएल के स्टार और वेस्टेंडीज के ताबड़तोड़ बल्लेबाज गेल को 'भारत में सबसे खतरनाक खिलाड़ी' का दर्जा दिया गया है।
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साइबर दुनिया के चालबाज हैकर्स आपको अपना शिकार बनाने के लिए आईपीएल के सितारों का सहारा ले रहे हैं। खास बात यह है कि इसकी खबर खिलाड़ियों तक को नहीं है। यह दावा है सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी मैकफी का।

भारत के सबसे खतरनाक खिलाड़ी
गेल जैसे तमाम खिलाड़ियों के नाम का इस्तेमाल करके हैकर्स दुनियाभर के इंटरनेट यूजर्स को खतरनाक वेबसाइट्स पर जाने पर मजबूर कर रहे हैं। उसके बाद, उनके कम्प्यूटर व मोबाइल में वायरस भेज रहे हैं। मैकफी ने ऐसे खिलाड़ियों को 'भारत के सबसे खतरनाक खिलाड़ी' नाम से एक लिस्ट में शामिल किया है।
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टॉप पर गेल, ली और श्रीसंत
इसमें ऐसे खिलाड़ियों के नाम हैं, जिनके नाम पर सबसे ज्यादा वायरस ट्रांसफर किए जा रहे हैं। कंपनी के मुताबिक, इस लिस्ट में गेल टॉप पर हैं। दूसरा नंबर है ब्रेट ली का और तीसरे पायदान पर स्पॉट फिक्सिंग मामले में फंसे श्रीसंत हैं।

चालाकी से करते हैं काम
मैकफी इंडिया सेंटर की इंजीनियरिंग यूनिट के वाइस प्रेसिडेंट वेंकटसुब्रमण्यम कृष्णपुर ने बताया कि साइबर क्रिमिनल्स ऐसे मौकों की तलाश में रहते हैं जब कोई मशहूर खिलाड़ी या शख्सियत सुर्खियों में हो। जैसे ही किसी घटना में उनका नाम उछलता है, ये हैकर्स इंटरनेट पर अपना खेल शुरू कर देते हैं। ये ऐसे लिंक देते हैं, जहां से यूजर्स वायरस से लैस वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं।

सचिन और युवराज भी निशाने पर
इंटरनेट पर अपने पसंदीदा खिलाड़ी की फोटो या वीडियो सर्च करने वाले यूजर्स को तमाम लिंक मिलते हैं, उनमें कुछ वायरस से लैस वेबसाइट्स भी होती हैं। उन पर क्लिक करते ही वायरस यजर्स की डिवाइस में पहुंच जाता है। गेल के नाम पर ऐसे करीब 32 वायरस लिंक पाए गए। इसी तरह, ब्रेट ली पर 31 और श्रीसंत के नाम से जुड़े 30 वायरस लिंक मिले।

अध्ययन में युवराज सिंह, डेविड मिलर, डेल स्टेन, केविन पीटरसन, केरोन पोलार्ड, मिशेल जॉनसन, विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों के नाम भी हैकर्स के निशाने पर पाए गए।

म्यूजिक में भी वायरस
दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने पाया है कि हैकर्स अब म्यूजिक, वाइब्रेशन और लाइटिंग को भी मालवेयर भेजने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले दिनों चीन में हुई एक कांफ्रेंस में इसका खुलासा हुआ।
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वैज्ञानिकों ने बताया कि हैकर्स कॉफी शॉप जैसी जगहों को निशाना बना रहे हैं, जहां लोग बेफिक्र होकर म्यूजिक का मजा लेते हुए बातचीत में मस्त रहते हैं।

इसी दौरान, हैकर्स ध्वनि तरंगों का सहारा लेकर वायरस ट्रांसफर करते हैं। वैज्ञानिक इसका हल खोजने में जुट गए हैं।
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