केंद्र सरकार ने तीन साल के भीतर गंगा नदी को स्वच्छ करने का लक्ष्य बनाया है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने बुधवार को कहा कि तीन साल के भीतर गंगा को स्वच्छ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत गंगा को प्रदूषित करने वाली इंडस्ट्रीज और सीवेज की समस्या का समाधान भी ढूंढा जाएगा।
साथ ही केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से फंड जुटाने के अलावा वैश्विक अनुभव से सफाई के तरीकों को सीखा जाएगा।
6 महीने में शुरू होगी योजना
उमा भारती ने कहा कि गंगा की सफाई की योजना को आगामी छह महीने में क्रियान्वित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘आप मुझे तीन साल दें। हम किसी से भी सीखने में हिचकिचाएंगे नहीं। हमें यह मुगालता नहीं है कि हम ही सर्वश्रेष्ठ हैं। अगर हमें लगेगा कि कोई हमसे ज्यादा बेहतर जानता है, तो हम उससे सीखेंगे। हम राइन, नील और थैम्स नदी से सीखेंगे।’
फंडिंग के बारे में उमा भारती ने बताया कि इसके लिए सरकार पीपीपी रूट का उपयोग किया जाएगा और इसके अलावा एनआरआई फंड भी स्थापित किया जाएगा। विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम पहले भी गंगा नदी को स्वच्छ करने में मदद देने का भरोसा जता चुके हैं।
समाधान ढूंढने की कोशिश
एक सेमीनार में उन्होंने कहा, ‘हम गंगा को तीन साल के भीतर स्वच्छ बनाना चाहते हैं।
इस दौरान हम पर्यावरण फ्लो (ई-फ्लो) को स्थापित करना चाहते हैं। इसके अलावा हम गंगा को प्रदूषित करने वाले कचरे की समस्या का समाधान भी ढूंढने का प्रयास करेंगे।’
उमा भारती ने कहा कि गंगा की सफाई की योजना को आगामी छह महीनों के भीतर क्रियान्वयन कर दिया जाएगा।