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स्वच्छता के प्रति अब भी हैं कुछ व्यावाहरिक अड़चनें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई के प्रति पूरे देश को जाग्रित जरूर किया है। लेकिन सरकार को इसके क्रियान्यवयन संबंधी कई व्यावहारिक मुश्किलों से रुबरु होना पड़ रहा है।
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सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान 2 अक्तूबर को गांधी जयंती पर शुरु करने का फैसला किया है। लेकिन सौ दिनों के लक्ष्य के लिहाज से सरकार के पास कहने को ज्यादा नहीं।

मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यों के शिक्षा विभाग सचिवों के साथ बैठक कर विद्यालयों में शौचालय निर्माण के मुद्दे पर बात की है। साथ ही ईरानी ने कॉरपोरेट कंपनियों को संदेश भेजा है कि अगर वह कॉरपोरेट सोशल रिस्पान्सबिलीटी (सीएसआर) के तहत स्कूलों में शौचालय के निर्माण का काम करना चाहते हैं तो सरकार उनकी पूरी मदद करेगी।
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गंदगी का नामोनिशान मिटाने का दावा

उधर ग्रामीण विकास और पेयजल व स्वच्छता मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों के मंत्रियों के साथ एक बैठक कर प्रत्येक जिला पंचायत में वैज्ञानिक तरीके से सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमैंट को शुरू करने का निर्देश दिया है।

वहीं मोदी के आह्वान पर टीसीएस और भारती फाउंडेशन ने आगे आकर सामाजिक दायित्व निर्वहन कोष (सीएसआर) से शौचालय तैयार करने पर 200 करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने का ऐलान किया है।

तकनीकी मजबूती को डीआरडीओ से भी मदद लेने की बात है। पीएम ने सांसदों से अपने एक साल के एमपी फंड का इस्तेमाल विद्यालयों के शौचालय बनाने पर खर्च करने को कहा है।

प्रधानमंत्री ने 2019 में महात्मा गांधी की 150 जयंती पर देश के प्रत्येक मोहल्ले, गांव, स्कूल,मंदिर और अस्पताल सभी क्षेत्र से गंदगी का नामोनिशान मिटाने की बात कही है।
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