लोकसभा चुनावों में 272 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचने की कोशिश कर रही भाजपा और उसके पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
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जाहिर है, इसके लिए कुछ नए दोस्त बनाने पड़ रहे हैं और इसी सिलसिले में कुछ पुराने दोस्त या अपनी ही पार्टी के नेता खफा भी हो रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी सुप्रीमो रामविलास पासवान को अपने पाले में करने में कामयाब रही भाजपा को अब पार्टी की बिहार इकाई के कुछ नेताओं को मनाने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है।
बिहार से शुरू हुई यह टेंशन अब महाराष्ट्र तक जा पहुंची हैं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने लोकसभा चुनावों के सिलसिले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बॉस राज ठाकरे से मुलाकात की और नया बवाल मच गया।
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राज-गडकरी मुलाकात पर बवाल
इस मुलाकात की खबर जैसे ही सामने आई, महाराष्ट्र में उसकी सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी शिवसेना खफा हो गई। राज ठाकरे और नितिन गडकरी की मुलाकात पर बिफरी शिवसेना ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में उनकी जरूरत नहीं है।
पार्टी यह आश्वासन भी दिया कि आगामी लोकसभा चुनावों में कोई भी दल उसके परंपरागत मराठा वोट बैंक में सेंध नहीं लगा पाएगा। मीडिया से बातचीत में शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, "एमएनएस के लिए अब सभी दरवाजे बंद हो चुके हैं।"
उन्होंने कहा, "राज ठाकरे की पार्टी के साथ अब किसी भी तरह की बातचीत की कोई जरूरत नहीं है। हमें एनडीए में उनकी जरूरत नहीं है और यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।'
शिवसेना ने जताई नाराजगी
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और राज की मुलाकात के बारे में संजय राउत ने कहा, "अगर भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता राज ठाकरे या शरद पवार का समर्थन करता है, तो इससे हमारे गठबंधन पर असर होगा।"
उन्होंने कहा, "निगम चुनावों में शिवसेना ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया है और आगामी लोकसभा चुनावों में भी मराठा वोट बैंक कहीं नहीं छिटक सकता, क्योंकि वो शिवसेना के साथ खड़ा है।"
संजय राउत ने कहा, "अगर भाजपा को एमएनएस के साथ कोई करार करना था, तो वह उसे गुजरात में सीटें दे सकती हैं या फिर बिहार-उत्तर प्रदेश में दे सकती है। लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा।"
शिवसेना बीच में खड़ी
शिवसेना ने आश्वासन दिया कि भाजपा के साथ उसका गठबंधन कांग्रेस-एनसीपी को शिकस्त देते हुए लोकसभा चुनावों में 40 सीटें जीतने में कामयाब रहेगा।
यह बवाल गडकरी और राज की मुलाकात से शुरू हुआ। भाजपा नेता ने एमएनएस प्रमुख से लोकसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार न उतारने की अपील की, ताकि कांग्रेस विरोधी वोट न बंट जाएं।
ऐसा बताया जा रहा है कि अगर राज ठाकरे इस बात पर हामी भरते हैं, तो भाजपा उन्हें विधानसभा चुनावों में सीटें देने का मन बना रही हैं। हालांकि, इस दोस्ती के बीच में फिलहाल शिवसेना मजबूती से खड़ी है।
उद्धव भी गुस्से में
मंगलवार सवेरे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकने ने भी भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी दल संचार में काफी गंभीर समस्या का सामना कर रहा है।
गडकरी-राज मुलाकात पर उद्धव ने पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखा, "भाजपा के भीतर कम्युनिकेशन गैप है, जो उन लोगों ने बनाया है जो कांग्रेस और एनसीपी नेताओं की तारीफ करते हैं।"
शिवसेना प्रमुख ने फोन कर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह को नाराजगी जताई और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को तलब कर अपना ऐतराज भी जता दिया।
शिवसेना को भले इस नई रिश्तेदारी पर आपत्ति हो, लेकिन आरपीआई (ए) नेता रामदास अठावले ने साफ कर दिया है कि वह राज ठाकरे की एनडीए में आमद का स्वागत करेंगे।
राज के साथ बढ़िया रिश्ते रखने वाले गडकरी ने मुंबई के एक होटल में उनसे मुलाकात की। ऐसा बताया जा रहा है कि उन्होंने एमएनएस नेता से कहा कि वह लोकसभा चुनावों में दावेदार खड़े न करे, ताकि वोट न बंटे।
2009 चुनावों में एमएनएस ने शुरुआत करते ही मराठी वोट में सेंध लगा दी थी। इस वजह से लोकसभा और विधानसभा में शिवसेना के कई उम्मीदवार हार गए थे।