पूर्ति ग्रुप को ब्याज रहित ऋण पर सीएजी की प्रतिकूल टिप्पणियों के कारण सियासी मुसीबत में घिरे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लोकसभा में अपना पक्ष नहीं रख पाए। दरअसल गडकरी की योजना मंगलवार को राज्यसभा की तरह लोकसभा में भी अपना पक्ष रखने की थी।
मगर वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की ओर से जताए गए एतराज के कारण गडकरी ऐसा नहीं कर पाए। आडवाणी का मानना था कि गडकरी की ओर से अपना पक्ष रखे जाने के कारण राज्यसभा की तरह ही लोकसभा में भी इस मुद्दे पर बिना वजह विवाद खड़ा होगा।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में विपक्ष ने लगातार तीन दिनों तक इस मुद्दे पर सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी। हालांकि लोकसभा में विपक्ष ने बेहद प्रतीकात्मक तरीके से इस मुद्दे का जिक्र किया था।
आहत हैं आडवाणी
आडवाणी के करीबियों का कहना है कि बजट सत्र के दूसरे चरण में लगातार हो रहे हंगामे, तर्कहीन बहस और आरोपों-प्रत्यारोपों के शुरू हुए सिलसिले से वरिष्ठ नेता आहत और नाराज हैं।
यही कारण है कि मंगलवार को एक और विवाद खड़ा होने की आशंका के कारण उन्होंने लोकसभा में गडकरी को पूर्ति ग्रुप से जुड़े विवाद पर अपना पक्ष नहीं रखने दिया।
गडकरी ने राज्यसभा में इस मुद्दे में किसी तरह का भ्रष्टाचार साबित होने पर राजनीति से संन्यास लेने के साथ ही लोकसभा की सदस्यता से भी त्याग पत्र देने की घोषणा की थी।
आडवाणी ने गडकरी को रोका
पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्र ने बताया कि मंगलवार को दोपहर राज्यसभा में इस
विवाद मामले में अपना पक्ष रखने के बाद गडकरी लोकसभा में भी ऐसा ही करना
चाहते थे।
मगर उस दौरान सदन में उपस्थित आडवाणी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। सूत्र के मुताबिक आडवाणी ने गडकरी से पूछा कि जब इस सदन में इस मामले में कोई विवाद नहीं है तब स्पष्टीकरण देने की जरूरत ही क्या है।
बताते हैं कि गडकरी ने इस मुद्दे पर लोकसभा में दूसरी बार अपना पक्ष रखने की कोशिश की, मगर आडवाणी ने फिर से ऐसा न करने की हिदायत दे कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
पार्टी के नेताओं से जाहिर की अपनी नाराजगी
आडवाणी के करीबी नेता का कहना था कि दूसरे चरण में सदन के अंदर शुरू हुए आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर, निरर्थक और तर्कहीन बहसों और हंगामे से आडवाणी नाराज और आहत हैं।
उन्होंने पार्टी के कई नेताओं से बातचीत कर अपनी निराशा भी जाहिर की है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार के कार्यकाल के एक साल में पहली बार लोकसभा में शीर्ष स्तर पर न केवल आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चला, बल्कि सदन की कार्यवाही भी कई बार स्थगित हुई।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा ने इस मामले को
लोकसभा में उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए गडकरी के
इस्तीफे की मांग की थी।