पेरिस में हुए आतंकी हमले के बाद पूरा विश्व आतंकवाद के खात्मे के लिए सुर में सुर मिला रहा है। ब्रिक्स देशों के अलावा विश्व की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 के सभी सदस्यों ने आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लिया है। लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहे भारत की आवाज को अंतत: वैश्विक समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा कि आतंकवाद से रक्षा के लिए वह जल्द ही एक व्यापक योजना संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश करेंगे।
जी-20 और ब्रिक्स की बैठक में वैश्विक नेताओं के संयुक्त कदम का साथ देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा की आतंकवादी समूहों की फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति और संचार चैनलों पर लगाम लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आतंकी समूहों द्वारा इंटरनेट नेटवर्क के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आतंकियों से लड़ने के लिए संयुक्त वैश्विक प्रयास जरूरी है। जी-20 सम्मेलन में मोदी ने कहा, ‘हमारी बैठक आतंक के खौफनाक साये में हो रही है। आतंकवाद से लड़ना निश्चित तौर पर जी-20 की प्राथमिकता होनी चाहिए। पूरी मानव जाति को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट चाहिए। आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त वैश्विक प्रयास की जरूरत है और यह बहुत जरूरी है।’
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबाना ने पेरिस हमले के दोषियों को ढूंढने में फ्रांस के साथ होने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि गलत विचारधारा के आधार पर निर्दोष लोगों की हत्या सिर्फ फ्रांस या तुर्की पर हमला नहीं है बल्कि यह सभ्य विश्व पर किया गया हमला है। उन्होंने संकल्प लिया कि आईएसआईएस को उखाड़ फेंकने के प्रयासों को दोगुना करेंगे क्योंकि पेरिस के भयानक हमले और सीरिया के युद्ध ने सम्मेलन को फीका कर दिया है। जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा कि जी-20 सम्मेलन के जरिये हम एक मजबूत संदेश दे रहे हैं कि किसी भी तरह के आतंकवाद की तुलना में हम ज्यादा मजबूत हैं।
पेरिस हमले की निंदा
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि वह हिंसक कट्टरपंथ और आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में जल्द ही एक व्यापक योजना पेश करेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा, ‘हम सब ने हाल ही में पेरिस में घटी खौफनाक घटना देखी है और हम प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं।
आतंकवादी धमकियों से प्रभावी तरीके से निपटने के संयुक्त प्रयासों में रूस हमेशा शामिल होने की इच्छा रखता है। निश्चित रूप से यह आवश्यक है कि संयुक्त राष्ट्र की सहमति के अनुसार ही इस दिशा में कदम उठाया जाए।’ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ ज्यादा मिलजुल कर काम करेंगे ताकि आतंकवाद और इसके सभी स्वरूपों से लड़ा जा सके। वहीं यूरोपियन यूनियन के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने कहा कि आईएसआईएस के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई में हमारा लक्ष्य एक दूसरे के साथ सहयोग का होना चाहिए।
जी-20 सम्मेलन में आम तौर पर समावेशी आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे मसलों पर चर्चा होती है। हालांकि, बैठक के अंत में सोमवार को आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर तालमेल और सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य आतंकवाद की फंडिंग को समाप्त करना है। आतंकवाद पर की जाने वाली घोषणा इस सम्मेलन की घोषणा से अलग होगी जिसमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को जल्द लागू करने की मांग की जा सकती है। इसके जरिये इस्लामिक स्टेट जैसे समूहों को पैसे भेजे जाने और तेल की कालाबाजारी के जरिये फंड जुटाने की व्यवस्था समाप्त की जाएगी।
तकनीकी तौर पर कमजोर करने का फैसला
जी-20 की आतंकवाद से संबंधित घोषणा में आतंकियों द्वारा तकनीक, संचार और इंटरनेट सहित आतंकी गतिविधियों को उकसाने वाले संसाधनों के गलत इस्तेमाल को रोकने की योजनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 सम्मेलन के पहले हुई ब्रिक्स नेताओं की बैठक में कहा, ‘पेरिस में हुए आतंकी हमले की हम सब एक साथ कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं। पूरी मानवता को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।’
उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई ब्रिक्स देशों के कदमों का महत्वपूर्ण पहलू होना चाहिए। आतंकवाद की विपत्ति बढ़ती जा रही है और सभी मानव जाति को एकजुट होकर इससे लड़ने की जरूरत है। ब्रिक्स देशों को इसे तरजीह देनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम सिनाई में लोगों के मारे जाने पर रूस के साथ सहानुभूति व्यक्त करते हैं और उसका समर्थन करते हैं। अंकारा और बेरूत भी इस बात की याद दिलाते हैं कि आतंकवाद किस तेजी से बढ़ रहा है और उसका क्या प्रभाव पड़ रहा है।’ ब्रिक्स द्वारा जारी बयान के अनुसार सदस्य देशों के अन्य नेताओं ने भी आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।